story
<% catList.forEach(function(cat){ %> <%= cat.label %> <% }); %>
<%- node_title %>
Published On
By <%= createdBy.user_fullname %>
<%- node_title %>
Published On
By <%= createdBy.user_fullname %>
<% if(node_description!==false) { %> <%= node_description %>
<% } %> <% catList.forEach(function(cat){ %> <%= cat.label %> <% }); %>
Story: जब बापू ने मेरी बीएड के लिए अपनी ट्रॉली बेच दी
Published On
By Sach Kahoon Desk
Story: मनुष्य इस संसार में आता है और एक दिन चला भी जाता है। यहां कोई भी सदा के लिए ठहरने नहीं आया। जो जन्म लेता है, उसका अंत निश्चित है; परंतु जीवन की धारा स्मृतियों के सहारे ही आगे बढ़ती रहती है। जैसे माँ का जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है, वैसे ही […]
Sant and Shishya: समुद्र के किनारे पर एक गुरु और उनका शिष्य ….
Published On
By Sach Kahoon Desk
Sant and Shishya: समुद्र के किनारे पर एक गुरु और उनका शिष्य बैठे थे। लहरों की मधुर ध्वनि वातावरण को गंभीर और पवित्र बना रही थी। तभी शिष्य ने अपने गुरु से भावुक होकर कहा, ‘गुरुदेव, जब मैं आपके ज्ञान के बारे में सोचता हूं, तो आश्चर्य में पड़ जाता हूं। मैंने आपसे बड़ा कोई […]
जिसका काम उसी को साजे …
Published On
By Sach Kahoon Desk
Story of Washerman: एक धोबी था। उसके पास एक गधा और एक कुत्ता था। धोबी सुबह-सुबह गधे पर कपड़े लादकर और कुत्ते को साथ ले घाट पर पहुंच जाता। घाट पर धोबी कपड़े धो-धोकर सुखाता और कुत्ता उनकी रखवाली करता जबकि गधा सारा दिन पेड़ की छांव में खड़ा घास चरता रहता। दिन ढलने पर […]
Daughter Like Son: बेटों जैसी बेटी
Published On
By Sach Kahoon Desk
रमेश सेठी बादल Daughter Like Son: गाँव की पगडंडी पर धूप हल्की-हल्की बिखरी थी। मैं चक्की से आटा लेकर लौटती एक लड़की को देख रुक गया। सहज जिज्ञासा से पूछ बैठा – ‘बेटा, तुम किस घर की हो? किसकी बेटी हो?’ उसने बिना हिचक, आत्मविश्वास भरे स्वर में कहा – ‘अंकल जी, मैं मास्टर करमचंद […]
गंदा राजा और शैतान खरगोश
Published On
By Sach Kahoon Desk
Story Kings and Rabbits: बहुत पुरानी बात है। मॉरिशस में एक राजा रहता था। दुनिया के तमाम आलसी राजाओं की तरह वह राजा भी आलसी था और नहाता नहीं था। न नहाने के कारण उसके शरीर पर मैल की मोटी परत जम गयी। एक बार उसका शरीर खुजलाने लगा। इससे शरीर पर दाने निकल आए। […]
असफलता से घबराएं नहीं
Published On
By Sach Kahoon Desk
Failure: कई बार देखा गया है किसी एक कार्य में असफलता हो जाने से व्यक्ति निराशा के गहरे गर्त में डूबता चला जाता है। उसका सारा उत्साह जैसे निचुड़ सा जाता है। हौंसले पस्त हो जाते हैं। गहरी हीन भावना उसे अवसादग्रस्त कर देती है। उसे लगता है वह जीवन में कुछ नहीं कर सकता। […]
Fishes Story: तीन मछलियां
Published On
By Sach Kahoon Desk
Fish Story: एक नदी के किनारे उसी नदी से जुड़ा एक बड़ा जलाशय था। जलाशय में पानी गहरा होता है, इसलिए उसमें काई तथा मछलियों का प्रिय भोजन जलीय सूक्ष्म पौधे उगते हैं। ऐसे स्थान मछलियों को बहुत रास आते हैं। उस जलाशय में भी नदी से बहुत-सी मछलियां आकर रहती थी। अंडे देने के […]
राजा और खरगोश
Published On
By Sach Kahoon Desk
Story: बहुत पुरानी बात है। मॉरिशस में एक राजा रहता था। दुनिया के तमाम आलसी राजाओं की तरह वह राजा भी आलसी था और नहाता नहीं था। न नहाने के कारण उसके शरीर पर मैल की मोटी परत जम गयी। एक बार उसका शरीर खुजलाने लगा। इससे शरीर पर दाने निकल आए। राजा खुजली, दर्द […]
गुरु प्रेम अमूल्य वस्तु
Published On
By Sach Kahoon Desk
Guru Prem प्रात: काल का समय था। वायु पेड़ों के पत्तों से खेल रही थी। भोर का नभ पूर्व में पहाड़ियों के काले बादलों से ढका था। पक्षियों की चहचहाट सारे वातावरण को जगाने का प्रयत्न कर रही थी। फूलों के पराग की महक संपूर्ण सृष्टि को मदमस्त बना रही थी। ऐसे खुशमिजाज प्राकृतिक परिवेश […]
कविता – माँ मैं फिर आऊंगा
Published On
By Sach Kahoon Desk
Kavita: तेरे आँगन को, किलकारियों से फिर महकाऊँगा ! तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा बेशक दुनिया से विदा हो चला, पर तेरे आस – पास सदा मैं रहूंगा, झेली हो छाती पर गोलियां कितनी, पर दर्द भरी कहानियाँ तुझसे न कहूंगा ! मत रोना मेरी कब्र पर, किस्सा फिर कभी सुनाऊंगा। तूं घबरा […]
एक झूठी दिलासा
Published On
By Sach Kahoon Desk
Jhuthi Dilasa Story: टोनी के पापा चले गए इस संसार से जब तीन साल का था टोनी। ‘‘सबके पापा हैं। मेरे पापा कहाँ हैं। आते नहीं हैं। रामू के पापा तो चले गए थे वो तो आ गए। मिठाइयाँ लाए थे। टॉफियाँ लाए थे। मेरे पापा पता नहीं कब आयेंगे। आयेंगे तो खूब बात करूँगा। […]
कहानी: आत्म-मंथन
Published On
By Sach Kahoon Desk
Story: सुनो सखी रेवा, कैसा जमाना आ गया है? कैसी विक्षिप्त मानसिकता में जी रहे हैं लोग? कैसी विक्षिप्त चाहत है लोगों की? औरत ही जन्म का आधार होती है लेकिन जन्म का आधार ही आधार को जन्म नहीं देना चाहता। मीनू मेरे पड़ोस में रहती है। तीन बहनों में सबसे बड़ी। बड़ी होने का […]