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Thursday, April 23, 2026
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    India Strikes Pakistan: पाकिस्तान में आतंक के जनाजे में पाकिस्तान पुलिस व फौज शामिल क्यों हुई?

    India Strikes Pakistan
    India Strikes Pakistan: पाकिस्तान में आतंक के जनाजे में पाकिस्तान पुलिस व फौज शामिल क्यों हुई?

    India Strikes Pakistan: डॉ. संदीप सिंहमार। कश्मीर के पहलगाम में निहत्थे पर्यटकों पर धर्म पूछकर किए गए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर व पाकिस्तान में मिसाइल अटैक कर आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त किया। इस घटना ने एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान के बीच की तनावपूर्ण स्थिति को उजागर किया। भारत द्वारा यह कदम सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक स्पष्ट संकेत था कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का संकल्प अडिग है। भारत की कार्रवाई में पाकिस्तान के किसी भी सैन्य ठिकाने या आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया। सिर्फ आतंकवाद को कुचलने के लिए कार्रवाई को अंजाम दिया। भारत की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान तिलमिला गया। पर यह बात नहीं भूलना चाहिए कि भारत में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम पाक की सर जमीं पर ट्रेनिंग लेने वाले पाकिस्तानी आतंकवादी देते हैं। भारत ने सिर्फ इन्हीं ठिकानों को नष्ट करने का काम किया है।

    इस हमले के पीछे की सोच और पाकिस्तान में आतंकवाद के प्रति सरकार की मौन सहमति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।पाकिस्तान, जो खुद आतंकवाद से जूझता रहा है, के अंदर आतंकियों के ठिकाने बने रहना एक बड़ा प्रश्न चिह्न है? यह विडंबना तब और गहरी होती है, जब यह देखा जाता है कि पाकिस्तान की सेना और पुलिस, जो देश की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं, वे आतंकियों के जनाजों में शामिल होते हैं और उनके प्रति संवेदना दर्शाते हैं। इस प्रकार की घटनाएँ इस बात का संकेत देती हैं कि पाकिस्तान की सेना और सरकार आतंकवाद को एक रणनीतिक उपकरण के रूप में देखती है। भारत के संदर्भ में पाकिस्तान ने आतंकी समूहों को अपने प्रभाव क्षेत्र में स्थापित किया है ताकि वे भारत की सुरक्षा को कमजोर कर सकें। यह समझना भी आवश्यक है कि आतंकवाद का उपयोग काफी समय से पाकिस्तान की सैन्य तथा राजनीतिक नीतियों में किया जा रहा है। यहाँ तक कि कुछ आतंकी संगठनों पर नकेल डालने की कोशिशें भी अक्सर राजनीतिक निर्णयों से जुड़ी होती हैं। भारत का यह मिसाइल अटैक एक निर्णायक क्षण था, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि भारत आतंकवाद के प्रति अपनी नीति को गंभीरता से लेता है। भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने का समर्थन किया है, और इस हमले ने यह दिखा दिया कि वे किसी भी कीमत पर सुरक्षा के लिए तैयार हैं। यह कार्रवाई एक चेतावनी थी केवल पाकिस्तान के आतंकियों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य आतंकवादी संगठनों के लिए भी कि भारत अपनी सुरक्षा पर समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति सहिष्णुता को केवल एक राष्ट्रीय मुद्दा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर एक समस्या के रूप में उठाना आवश्यक है।

    अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझना होगा कि पाकिस्तान द्वारा पनपते आतंकवाद का प्रतिकार सभी देशों की जिम्मेदारी है। वैश्विक स्तर पर एक स्पष्ट और कठोर नीति बनाना आवश्यक है, जो आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और सजगता को बढ़ावा दे सके। भारत का मिसाइल अटैक न केवल आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम था, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी भी थी कि आतंकवाद का खेल अब समाप्त होना चाहिए। पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों का अस्तित्व और उनके प्रति सरकारी और सैन्य समर्थन एक गंभीर समस्या है, जिसे केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि एक समग्र वैश्विक दृष्टिकोण से ही हल किया जा सकता है। भारत ने जो कदम उठाया है, वह निश्चित रूप से आतंकवाद के खिलाफ एक ठोस स्थिति है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी स्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों। पर पाकिस्तान अभी भी अपनी पुरानी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी फ़ौज की गोलीबारी में भारतीय आम नागरिकों को निशाना बनाया जाना आत्म रक्षा का परिचायक नहीं है, बल्कि कायराना हरकत है। इतना ही नहीं बुधवार को भारत के अटैक के बाद पाकिस्तान के वजीर ए आजम शरीफ ने पाक संसद में अपनी लाज बचाने के लिए झूठ भी बोली कि हमने भारतीय लड़ाकू विमानों को धूल चटा दी। पर सच्चाई दुनिया से छुपी नहीं है। आज नहीं तो फिर सच्चाई सामने आ ही जाएगी। पाकिस्तान एक तरफ जहाँ भारत को करारा जवाब देने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ संयम बरतकर बातचीत की बात भी कर रहा है। यही है पाकिस्तान का दोहरा चेहरा, जिसे वर्तमान में पूरी दुनिया देख रही है।

    पाकिस्तान में आतंक के जनाजे में पाकिस्तान पुलिस व फौज शामिल क्यों हुई?

    पाकिस्तान में आतंकवाद एक जटिल और बहुआयामी समस्या है, जिसने न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संरचना को भी चीर-फाड़ दिया है। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दम तोड़ने वाले आतंकवादियों के जनाजे में पाकिस्तान पुलिस और सेना शामिल हुई हैं। यह सबसे बड़ा सवाल है। इसका मतलब सीधा है कि इन आतंकवादियों का सीधा पाकिस्तान से संबंध था। तभी आतंक के जनाजों में पाकिस्तान फौज न केवल शामिल हुई बल्कि अपनी सहानुभूति भी दिखाई। इस घटना की परिकल्पना करना, एक ऐसी गहन चर्चा की आवश्यकता है, जो पाकिस्तान की आतंकवादी नीतियों और उनकी सुरक्षा बलों की भूमिका को दर्शाते हैं। पहला पहलू यह है कि पाकिस्तान की राजनीति में कई समूहों और संगठनों ने आतंकवाद को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया है। कुछ राजनीतिक दल और धार्मिक संस्थाएं आतंकवादी समूहों के समर्थक बन चुकी हैं। जब पुलिस और सेना आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं, तो यह पता चलता है कि पाकिस्तान व आतंकवादी संगठन आपस में मिले हुए हैं। सुरक्षा बल उन समूहों से गुप्त समझौतों में हैं या उनकी गतिविधियों को सहानुभूति के साथ देखते हैं। दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि पाकिस्तान में धार्मिक कट्टरपंथ और आतंकवाद को अक्सर पैतृक समझा गया है। कई मामलों में, पुलिस और सेना ने स्थानीय मान्यताओं को आधार बनाया होगा। पर जो भी हो ऐसा करने से पाकिस्तान दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। हालांकि यह एक विवादास्पद मुद्दा है, जो यह दर्शाता है कि क्या पाकिस्तान खुद आतंकवाद को प्रोत्साहित करता है। ऐसे मामलों में, जरुरत इस बात की है कि सरकार और सुरक्षा बलों को अपनी प्राथमिकता को स्पष्ट करना होगा। इस सिद्धांत को दुरुस्त करने के लिए पाकिस्तान सरकार की कमजोरी भी एक कारक है। जब राज्य आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी जिम्मेदारी में असफल होता है, तो यह उन समूहों को बढ़ावा देता है जो आतंकवाद को एक वैधता प्रदान करते हैं। पुलिस और सेना का आतंकवादियों के जनाजों में शामिल होना एक रूप में अव्यवस्था और अविश्वास को दर्शाता है, जो पुलिस बलों और सेना के कार्यों में व्यापक रूप से देखा जा सकता है। इसलिए ये तथ्य स्पष्ट करते हैं कि पाकिस्तान में आतंकवाद और उसके जनाजों में सुरक्षा बलों की भागीदारी एक जटिल नीतिगत और सामाजिक समस्या का परिणाम है। यह देश की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है और इस पर गंभीरता से विचार की आवश्यकता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सक्षम और संवेदनशील नीति आवश्यक है, ताकि देश के नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।