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Thursday, April 23, 2026
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    येलो, रेड व ब्लू मेट्रो रूट पर 8-8 कोच की होंगी सभी ट्रेनें

    All trains will have 8-8 coaches on Yellow, Red, and Blue Metro routes

    कुल 120 कोच में से 40 कोच बॉम्बार्डियर से व 80 कोच भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड से लिए

    सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम। मेट्रो में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) ने तीन मेट्रों रूटों पर चलने वाली ट्रेनों में कोचों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब इन तीनों रूटों पर सभी मेट्रो 6 से बढ़कर 8 कोच की हो जाएंगी। माना जा रहा है कि इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

    दिल्ली मेट्रो के पास वर्तमान में 336 ट्रेनों के सेट हैं, जिसमें 181 छह कोच वाली ट्रेनें, 133 आठ कोच वाली ट्रेनें और 22 चार कोच की ट्रेनें हैं। दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन-2 हुडा सिटी सेंटर से समयपुर बादली, रेड लाइन-1 रिठाला से शहीद स्थल न्यू बस अड्डा, ब्लू लाइन 3, 4 यानि द्वारका सेक्टर-21 से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी/वैशाली की ट्रेनों में कोच बढ़ाए जा रहे हैं।

    इनमें 120 अतिरिक्त कोच जोड़कर 6-कोच वाली ट्रेनों को 8-कोच वाली ट्रेनों में परिवर्तित करने की योजना पर काम हो रही है। इस महीने के अंत तक, येलो लाइन पर सभी बारह 6-कोच वाली ट्रेनों को 8-कोच में बदलने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, जिससे इस लाइन पर कुल 8-कोच वाली ट्रेनों की संख्या 64 हो जाएगी।

    इसके बाद ब्लू लाइन पर नौ 6-कोच और रेड लाइन पर उनतालीस 6-कोच वाली ट्रेनों को इस साल के अंत तक 8-कोच वाली ट्रेनों में बदल दिया जाएगा। जिससे इन लाइनों पर कुल 8-कोच वाली ट्रेनों की संख्या क्रमश: 74 और 39 हो जाएगी। इन 120 कोचों में से 40 कोच बॉम्बार्डियर से और 80 कोच भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) से खरीदे गए हैं।

    डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक कारपोरेट कम्युनिकेशंस की ओर से जानकारी दी गई है कि यह गतिविधि दिल्ली मेट्रो के तीन मुख्य कॉरिडोर यानी रेड (लाइन-1), ब्लू (लाइन-3/4) और येलो (लाइन-2) लाइन की वहन क्षमता को बढ़ाने के लिए की जा रही है। इन रूटों पर दिल्ली मेट्रो के कुल रूटों के मुकाबले रोजाना लगभग 40-50 फीसदी यात्री यात्रा करते हैं।

    शुरू में ही मेट्रो टै्रक बिछाए जाने के समय ही इन लाइनों को फेज-1 के तहत चालू किया गया था, जिन्हें ब्रॉड गेज पर बनाया गया था और यहां 8-कोच तक की ट्रेनों का प्रावधान था। बाद में अन्य बची लाइनों को भी स्टैंडर्ड गेज का बनाया गया।

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