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    क्या गलवान घाटी में फिर हुई चीनी सैनिकों से झड़प? सेना ने दिया जवाब

    नई दिल्ली (एजेंसी)। सेना ने लद्दाख से लगती सीमा पर चीन के साथ समझौतों के टूटने और दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़पों की रिपोर्ट से संबंधित लेख को गलत तथ्यों पर आधारित और भ्रमित करने वाला करार देते हुए इसका खंडन किया है। सेना ने बुधवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि उसने एक अंग्रेजी दैनिक में बुधवार को छपे इस लेख, ‘भारत-चीन के बीच दोबारा भिड़ंत पूर्वी लद्दाख में पीएलए की वापसी’ का संज्ञान लिया है। सेना ने कहा है कि यह लेख गलतियों और भ्रामक जानकारी से भरा है। सेना ने दोहराया कि चीन के साथ समझौतों के टूटने की खबर झूठी तथा आधारहीन है। सेना ने कहा है कि इस वर्ष फरवरी में जब से सैनिकों के पीछे हटने का समझौता हुआ है दोनों ही पक्षों ने खाली किए गए क्षेत्रों पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश नहीं की है। गलवान घाटी या किसी अन्य क्षेत्र में सैनिकों के बीच झड़प नहीं हुई है जैसा कि इस लेख में रिपोर्ट किया गया है। पत्रकार की मंशा गलत है और उसका लेख सच्चाई पर आधारित नहीं है।

    चीनी सैनिकों की सभी गतिविधियों पर नजर

    सेना की ओर से इस वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों पक्ष बाकी बचे मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर स्थिति पहले जैसी ही है और भारतीय सेना चीन के सैनिकों की सभी गतिविधियों पर निरंतर नजर रखे हुए हैं सेना ने कहा है कि यह लेख सही तथ्यों पर आधारित नहीं है और वह इसका जोरदार शब्दों में खंडन करती है। रिपोर्टों के अनुसार मीडिया में छपे एक लेख में दावा किया गया है कि चीन की सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कुछ जगहों से घुसपैठ की है और कम से कम एक जगह पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प भी हुई है।

    चीन ने सीमा पर 1959 में किए दावे को फिर से दोहराया

    सामरिक मामलों के विशेषज्ञ और एक समय भारतीय सेना में कर्नल रहे अजय शुक्ला ने कहा, “बीते एक साल के दौरान भारत चीन के बीच सीमा पर जारी गतिरोध ने दोनों देशों के आपसी संबंधों को काफी बदल दिया है। चीन ने सीमा पर 1959 में किए दावे को फिर से दोहराया है। अगर भारत इसे स्वीकार करता है तो सीमा पर बहुत सारा इलाका चीन के हिस्से में चला जाएगा। शुक्ला और अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में चीन के आगे बढ़ने का मतलब भारत के सैकड़ों वर्ग किलीमीटर जमीन पर चीन का स्वामित्व हो जाएगा। कई दौर की बातचीत के बाद दोनों देश पैंगोंग त्सो झील के इलाके में अपनी सेना को पीछे करने पर सहमत हुए। लेकिन चीन ने हॉट स्प्रिंग, गोगरा पोस्ट और डेपसांग से वापसी का संकेत नहीं दिया है।

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