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    बादल फटने से, जीवनरक्षक दवाएं व खाने का सामान बहा

    Light clouds in Haryana sachkahoon
    • अमरनाथ यात्रा में हुए मंजर के घटनाक्रम को भी किया सांझा

    गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा) अमरनाथ यात्रा में आने वाले यात्रियों को चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए पूरी तैयारियां थी। देश की प्रमुख हाई ऐल्टिटूड मेडिकल फोर्स सिक्स सिग्मा सेना के सैनिकों की तरह तैनात थी। तभी बादल फटा और टीम की आंखों के आगे सब कुछ सैलाब की भेंट चढ़ गया। भले ही माल की हानि हुई हो, लेकिन जान सबकी बची और जनसेवा को फिर से सक्रिय हो गए। हाई ऐल्टिटूड मेडिकल फोर्स सिक्स सिग्मा के सीईओ डॉ. प्रदीप भारद्वाज का कहना है कि वर्ष 2014 से ही संस्था के सदस्य हमेशा अमरनाथ गुफा के सबसे नजदीक होते हैं।

    इस बार (2022 में) भी किसी भी यात्री को चिकित्सा सेवाएं देने के लिए देश की प्रमुख हाई ऐल्टिटूड मेडिकल फोर्स सिक्स सिग्मा सेना के सैनिकों की तरह तैनात थी। अमरनाथ यात्रा में हुए मंजर के घटनाक्रम को सांझा करते हुए उन्होंने बताया कि संस्था के जितने भी सदस्य टेंटों में रहते थे, वे सभी बादल फटने से आए पानी में बह गए थे। साथ में सभी जीवन रक्षक दवाएं, चिकित्सा उपकरण व खाने का सामान सैलाब में बह गया। कृपा इतनी रही कि संस्था के सभी सदस्य सुरक्षित बच गए थे। क्योंकि वे उस समय उन टैंटों में नहीं थे।

    मलबा, मौत, मातम के बीच होती रही मन्नतें

    सिक्स सिग्मा के सदस्यों ने यात्रियों को मलबे में दबे हुए देखा। मलबा, मौत, मातम, मन्नत और मदद की दास्तान। पीछे धंसता ट्रैक, आगे बरसते पत्थर और पानी का सैलाब। चारों तरफ उन लोगों की चीख-पुकार थी, जो इस मंजर की चपेट में आने से बच गए थे या फिर पत्थरों के नीचे दबकर घायल हो गए थे। जीवन पर इस खतरे से भी सिक्स सिग्मा ने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि सेना के साथ मिलकर बचाव का कार्य भी किया और घायलों का उपचार भी शुरू किया।

    उपचार के लिए फिर से सभी सुविधाएं जुटाई गई। डॉ. भारद्वाज का कहना है कि आज दुनिया को प्रकृति ने अपनी क्षमता को देखने का एक और दर्पण दे दिया है। अमरनाथ में बादल फटने की आफत दबे पांव आई और किसी को संभलने तक का मौका नहीं दिया।

    मुसीबतों से भिड़ आगे बढ़ने का पर्यायवाची है सिक्स सिग्मा

    मूलरूप से हरियाणा के झज्जर जिला निवासी डॉ. प्रदीप भारद्वाज दुर्गम यात्राओं में सिक्स सिग्मा के माध्यम से चिकित्सा सेवाएं देते हैं। वे कहते हैं कि आस्था के सैलाब में जब हम अपना घर-परिवार छोड़कर, जिंदगी बचाने के लिए, घोड़े-खचर पर दवाइयां व सामान लादकर पहाड़ों पर चलते हैं, तो कभी गिरते हैं, उठते हैं, बीमार भी होते हैं। मुश्किल से जिंदगी आगे बढ़ती जाती है। बस फर्क इतना होता है कि कुछ लोग जिंदगी में आई मुश्किलों से टूट जाते हैं तो हमें छोड़कर चले जाते हैं। कुछ मुसीबतों की आंखों में आंखे डाल भिड़ जाते हैं।

    विपरीत हालातों में भी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के जरिए वो जीत जाते हैं और उदाहरण बन जाते हैं। इन सब बातों का पर्यायवाची है सिक्स सिग्मा है। सिक्स सिग्मा के वीर-वीरांगनाओं ने देश के प्रति असाधारण साहस, बहादुरी, जुनून, समर्पित सेवा भाव व प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। हिमालय की ऊंची चोटियों पर नि:स्वार्थ रूप से किसी भी वर्ग, पंथ, नेता, धर्म या जाति इत्यादि की परवाह किए बिना उच्च शिखरों पर जोखिमों भरी स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। हमारा भी इन जांबाजों को सेल्यूट है।

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