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    स्कूलों के लिए खतरनाक प्रीपेड मीटर, कहां से लेकर आएं एडवांस रुपए: डीटीएफ

    डैमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने सरकार से की नादरशाही फैसला वापिस लेने की मांग

    चंडीगढ़। (सच कहूँ/अश्वनी चावला) पंजाब सरकार द्वारा सरकारी बिजली कनैक्शनों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने लाजिमी करने से सबसे खतरनाक स्थिति में स्कूल ही आएंगे, जहां सरकार द्वारा बिजली का बिल भरने के लिए कोई फंड ही नहीं दिया जाता है। बहुत से स्कूलों में बिजली का बिल पंचायतों द्वारा भरा जाता है या फिर आपस में पैसे एकत्रित करते हुए अध्यापक भरते हैं लेकिन अब प्रीपेड मीटर आने से विद्यार्थियों व अध्यापकों को बड़ा नुक्सान होगा। इसलिए डैमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) इस फैसले की खिलाफत करते हुए संघर्ष का बिगुल बजा दिया है।

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    इस फैसले के तहत लगाए जाने वाले स्मार्ट चिप वाले प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने उपरांत ही चलेेंगे, इस तरह लोगों के लिए जरूरी सेवाओं से संबंधित शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधा देने वाले स्कूलों व अस्पतालों के प्रबंध में भारी मुश्किलों आने के आसार बन गए हैं, जिस कारण अध्यापकों ने सरकार द्वारा थोपे जा रहे इस फैसले को गैर वाजिब करार देते तुरंत वापिस लेने की मांग की है।

    इस संबंधी डीटीएफ पंजाब के राज्य प्रधान विक्रम देव सिंह, जनरल सचिव मुकेश कुमार व वित्त सचिव अश्वनी अवस्थी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार राज्य के सरकारी ढांचे को बेहतर बनाने की जगह तहस-नहस करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूल व सरकारी अस्पताल गरीब लोगों का एकमात्र सहारा हैं, इसलिए बनता तो यह था कि इन संस्थाओं को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करते लोगों के लिए उपयोगी बनाया जाए, लेकिन सरकार निजीकरण की नीतियों को लागू करने के लिए तत्पर नजर आ रही है।

    नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला केन्द्र सरकार के बिजली संशोधन बिल की तर्जमानी करते निजीकरण को उत्साहित करने के लिए लिया गया है। डीटीएफ के उप प्रधान राजीव बरनाला, गुरप्यार कोटली व बेअंत फुल्लेवाला ने कहा कि ‘आप’ सरकार का यह कदम बिजली से संंबंधित पूरे क्षेत्र को प्राईवेट हाथों में सौंपने की तैयारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य के अधिकारों को खोरा लगाने व लगातार लिए जा रहे लोक विरोधी फैसलों का विरोध करने की जगह पंजाब सरकार इन फैसलों के हक में भुगत रही है।

    नेताओं ने कहा कि यह फैसला आने वाले समय में आमजन पर भी जल्द ही सरकार लागू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि बिजली एक बुनियादी सुविधा है, जिसके बिना रहा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में बिजली बिल भरने के लिए कोई योग्य प्रबंध भी उपलब्ध नहीं है, तो अध्यापक रिचार्ज कहां से करवाएंगे? उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते कहा कि ऐसा लग रहा है कि सरकार की मंशा गरीबों के बच्चों को बिना बिजली के ही पढ़ाई करवाने की है, जिसका सख्त विरोध किया जाएगा।

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