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    ओढां में उठान न के बराबर, गेहूं व सरसों से अटी अनाज मंडी

    Farmer

    किसानों को लग रही दोहरी चपत, हेंडलिंग एजेंट तोल के नाम पर काट रहे जेबें

    • कई-कई दिनों से तोल के इंतजार में बैठे किसान
    • ट्रांसपोर्ट ठेकेदार उठान के नाम पर झाड़ रहा पल्ला

    ओढां (सच कहूँ/राजू)। सरकार द्वारा ये दावे किए गए थे कि फसल बेचते समय अनाज मंडियों में किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी दरपेश नहीं आने दी जाएगी। (Farmer) लेकिन ये दावे ओढां अनाज मंडी में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। किसान फसल लेकर कई-कई दिनों से मंडी में बैठे हैं, लेकिन उनकी कोई सुध नहीं ले रहा। इस बारे में जब अनाज मंडी में वस्तुस्थिति देखी गई तो सामने आया कि किसान अपनी फसल तुलवाने के लिए कभी हेंडलिंग एजेंटों के तो कभी अधिकारियों के सामने मिन्नतें करते नजर आ रहे हैं। किसान पिछले कई-कई दिनों से अपनी फसल के तोल के इंतजार में बैठे हैं।

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    अनाज मंडी में हैफेड के सरसों के करीब 33 हजार बैग शैड के नीचे उठान के इंतजार में पड़े हैं। खरीद से लेकर अब तक हैफेड द्वारा सरसों के महज 22 हजार बैग ही उठाए गए हैं। वहीं गेहूं के एक लाख 24 हजार बैग उठान के इंतजार में हैं। स्थिति ये है कि अनाज मंडी में फसल की ढेरी करना तो दूर फसल से भरा वाहन खड़ा करने तक की जगह नहीं बची है। पूछे जाने पर ट्रांसपोर्ट ठेकेदार सुनील कुमार ने यह कहकर पल्ला झाड़ा कि उठान तेजी से हो रहा है। जबकि उठान के नाम पर वहां कोई ट्रक नजर नहीं आया। उठान व तोल के फेर में किसान (Farmer) बूरी तरह से पिसकर रह गया है। इस समय बिजाई का सीजन चल रहा है, लेकिन किसान मंडियों में डेरा डालने को विवश हैं।

    गांव नुहियांवाली के किसान रमेश बडजाती, माड़ूराम कूकणा, जगदीश गेदर, नरेन्द्र कुमार, विजेन्द्र कुमार व ओढां के किसान गुरचेत सिंह ने बताया कि किसान (Farmer) अपनी फसल बेचने के लिए खरीद एजेंसियों व मार्केट कमेटी के आगे मिन्नतें करने को विवश हैं। न ही तो किसान की फसल तुल रही और न ही पैसे मिल रहे। किसानों ने बताया कि वे मंडी में सरसों लेकर आए थे। लेकिन पिछले 2 दिनों से यहां बैठे हैं, लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा। पूछे जाने पर उत्तर मिलता है कि जगह नहीं है।

    25 रुपये प्रति बैग मांगे

    नुहियांवाली के किसान माड़ूराम ने आरोप लगाया कि जब उसने एक हेंडलिंग एजेंट से तोल के बारे में पूछा तो उसने जल्दी तुलवाई की एवज में उससे 25 रुपये प्रति बैग मांगे। उसे ये भी कहा गया कि तुलवाई रात्रि में 8 बजे के बाद होगी। किसान ने बताया कि उसने जब मना किया तो उसकी 2 दिन बाद तक सरसों की तुलवाई नहीं हो रही।

    एजेंटों के पास वाहन फुल, प्रशासन के पास गुल

    मंडी में मार्केटिंग सोसायटी के टेंडर पर हो रहे तोल के उठान के लिए ट्रांसपोर्ट ठेकेदार द्वारा वाहन कम दिए जा रहे। जबकि हेंडलिंग एजेंटों को सुविधा पूरी दी जा रही है। इसी के चलते मंडी में उठान न होने से तोल कार्य नहीं हो पा रहा। सूत्रों के मुताबिक हेंडलिंग एजेंट ट्रांसपोर्ट ठेकेदार व चालक को सुविधा शुल्क देते हैं। जिसके चलते हेंडलिंग एजेंटों द्वारा तोले गए माल का तो उठान हो रहा है, लेकिन दूसरे तोल का नहीं।

    सोसायटी के टेंडर की ओर से लगाए गए तोल पर काम रहे मजदूरों ने कहा कि सरसों उतारने के लिए जगह नहीं है। इसलिए तोल नहीं हो रहा। उन्होंने दबी जुबान में माना कि हेंडलिंग एजेंट इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं। वहीं इस मामले में मार्केट कमेटी के सचिव ने कहा कि इस विषय में ट्रांसपोर्ट ठेकेदार को व्यवस्था सुधारने के लिए कई बार नोटिस भी दिए जा चुके हैं।

    जल्दी तुलवाई के नाम पर वसूल रहे मोटा शुल्क

    मंडी में हैफेड द्वारा सरसों व गेहूं की खरीद की जा रही है। इसके लिए छह जगह तोल लगाने का दावा किया गया है। खरीद एजेंसी हेंडलिंग एजेंटों को चार रुपये 67 पैसे प्रति बैग तोल के हिसाब से मजदूरी दे रही है। (Farmer) लेकिन हेंडलिंग एजेंट किसानों की जेबें काटने पर तुले हुए हैं। सामने आया है कि कुछ हेंडलिंग एजेंट किसानों की मजबूर कर फायदा उठाते हुए जल्दी तुलवाई के नाम पर मोटा शुल्क वसूल रहे हैं।

    हमने ट्रांसपोर्ट ठेकेदार को नोटिस देने के अलावा मौखिक तौर पर भी व्यवस्था सुधारने के लिए कहा। लेकिन वह गाड़ियां बढ़ाने का मात्र आश्वासन दे रहा है। यही कारण है कि जगह के चलते तोल नहीं हो रहा। इस विषय में हमने अपने उच्चाधिकारियों को अवगत करवा रखा है।
                                                                                                      – राजकुमार, परचेजर (हैफेड)।

    हेंडलिंग एजेंटों को खरीद एजेंसी तोल की निर्धारित मजदूरी देती है। अगर हेंडलिंग एजेंट किसी किसान से अतिरिक्त शुल्क वसूलता है तो इसकी सूचना हमें दें। हम हेंडलिंग एजेंट का तोल रोककर उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
                                                                                                  – विरेन्द्र कुमार, मैनेजर (हैफेड)।

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