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Thursday, March 5, 2026
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    पानी बचाने पर सर्वदलीय बैठक शीघ्र

    All-party meeting to save water soon

    पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंद्र सिंह ने विधानसभा में कहा

    • राज्य में पानी काफी नीचे चला गया

    चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि प्रदेश में धान की रोपायी 20 जून के बजाय एक जून किए जाने को खारिज कर करते हुए धान की रोपायी की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। प्रश्नकाल के दौरान सदन के नेता आम आदमी पार्टी के सदस्य कुलतार सिंह संधवां के भूजल संकट को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे । उन्होंने सभी सदस्यों को अवगत कराया कि इस साल धान रोपायी प्रयोग के तौर पर 13 जून की गई लेकिन धान रोपाई की तारीख बदली नहीं जाएगी ।

    कैप्टन सिंह ने बताया कि पिछले लंबे अर्से से राज्य में भूजल का दोहन होने से पानी काफी नीचे चला गया है जिससे आने वाले समय में जल संकट का सामना करना पड़ेगा । सरकार ने समय की नजाकत को पहचानते हुए जल संरक्षण के लिए फसल चक्र में परिवर्तन के लिए व्यापक रणनीति बनाने के लिए जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है जिसमें सर्वसम्मति बनायी जा सके ।

    राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाए

    कैप्टन सिंह ने सोमवार को सदन में बताया कि प्रदेश में पानी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसकी बबार्दी रोकने के लिए सख्ती की जरूरत है जिस पर आपसर मतभेद भुलाकर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाने की आवश्यकता है । पंजाब इस समय पानी की कमी से जूझ रहा है । इराडी कमीशन ने पानी का मूल्यांकन करते समय नदियों के जल का स्तर 17.1 एमएएफ होने का अनुमान लगाया था तथा तब से अब पानी का स्तर घटकर 13 एमएएफ रह गया है ।

    भूजल की औसतन 50 सेंटीमीटर गिरावट

    उन्होंने कहा कि पर्यावरण परिवर्तन के चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं जिससे पानी की समस्या बड़ा रूप लेती जा रही है । धरती के नीचे पानी तेजी से नीचे गिरता जा रहा है । यह सभी के लिए चिंता का विषय है । मुख्यमंत्री ने वर्ष 2019 में प्रकाशित ‘गतिशील जमींदोज पानी अनुमानित रिपोर्ट -2017’ का उल्लेख किया जिसके अनुसार प्रदेश के सारे 138 ब्लाकों में से 109 ब्लाक डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं (जहां जमीन का पानी रिचार्ज से अधिक निकाला गया है ) में शामिल हैं । प्रदेश के लगभग 85फीसदी रकबे में भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है तथा भूजल की औसतन गिरावट की सालाना दर 50 सेंटीमीटर है।