Groundnut Farming: वैज्ञानिक तरीके से करें मूंगफली की खेती, बढ़ाएं मुनाफा

जानें बुवाई का सही समय और वैज्ञानिक खेती के आसान उपाय

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मूंगफली देश की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है, जिसकी खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम मानी जाती है। यदि इसकी बुवाई उचित समय और वैज्ञानिक विधि से की जाए, तो कम लागत में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ मौसम में मूंगफली की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त रहता है। इस अवधि में भूमि में पर्याप्त नमी उपलब्ध होने के कारण बीजों का अंकुरण समान रूप से होता है और पौधों का विकास भी तेजी से होता है। Groundnut Farming

उन्नत उत्पादन के लिए किसानों को प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करना चाहिए। एमएच-4 तथा पंजाब मूंगफली नंबर-1 जैसी उन्नत किस्में अधिक उपज देने के साथ रोगों के प्रति अपेक्षाकृत सहनशील मानी जाती हैं। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर रखना लाभदायक होता है। वहीं पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने से उन्हें पर्याप्त पोषण, धूप और वायु मिलती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।

अच्छे उत्पादन के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन भी अत्यंत आवश्यक है। खेत की तैयारी के दौरान मृदा परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा जिंक जैसे पोषक तत्वों का उपयोग करना चाहिए। साथ ही जिप्सम का प्रयोग फली बनने की अवस्था में करने से दानों का विकास बेहतर होता है तथा कैल्शियम और सल्फर की कमी भी पूरी होती है।

खरपतवार नियंत्रण, समय-समय पर सिंचाई (जहां आवश्यकता हो), रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन अपनाकर किसान मूंगफली की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उचित तकनीक और आधुनिक कृषि पद्धतियों का पालन करने से यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। Groundnut Farming

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