शिक्षा और रोजगार
सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीज निजी केन्द्रों पर महंगे दामों में एक्स-रे कराने को मजबूर
पुरानी एक्स-रे मशीन खराब, नई अब भी डिब्बे में बंद, चालू होने में लगेंगे दस दिन
बरनाला (सच कहूँँ/जसवीर गहल)। Barnala News: जिले की छह लाख से अधिक आबादी के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र सिविल अस्पताल बरनाला महंगाई के इस दौर में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने में असफल साबित हो रहा है। अस्पताल प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण मरीजों को निजी केन्द्रों पर महंगे दामों में एक्स-रे करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मामला सिविल अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग से जुड़ा है, जहाँ पिछले 10-15 दिनों से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है।
मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मशीन की मरम्मत तो दूर, सरकार की ओर से भेजी गई नई एक्स-रे मशीन को भी अब तक डिब्बे से बाहर नहीं निकाला गया है। अस्पताल प्रशासन की सुस्ती के कारण नई मशीन कई दिनों से पुरानी मशीन के पास ही पैक अवस्था में धूल फांक रही है। इस बीच प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज निजी डायग्नोस्टिक केन्द्रों पर महंगे शुल्क देकर एक्स-रे कराने के लिए विवश हैं। अस्पताल के कमरा नंबर 13 में स्थित एक्स-रे कक्ष की पुरानी मशीन लगभग दो सप्ताह से पूरी तरह बंद पड़ी है।
जब इस संबंध में एक्स-रे कक्ष में तैनात रेडियोग्राफर से बात की गई तो उन्होंने पुष्टि की कि पुरानी मशीन खराब हो चुकी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नई मशीन अस्पताल में पहुंच चुकी है, लेकिन उसे अभी तक चालू नहीं किया गया है। इसके अलावा अस्पताल में लंबे समय से ब्लड बैंक बंद पड़ा है, जबकि मातृ एवं शिशु अस्पताल में नवजात शिशुओं की नर्सरी भी संचालित नहीं हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं और अस्पताल परिसर के पार्कों में फैली गंदगी स्वच्छता संबंधी दावों की पोल खोल रही है। इस पूरे मामले और अधिकारियों की कथित लापरवाही के संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ. हरिपाल सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने हर बार की तरह फोन रिसीव नहीं किया।
अभी लगेंगे करीब दस दिन: एसएमओ
मामले पर संपर्क किए जाने पर एसएमओ बरनाला डॉ. इंदु बांसल ने पुरानी एक्स-रे मशीन के खराब होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पुरानी मशीन अब ठीक नहीं हो सकती, इसलिए उसे कंडम घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। कंडम का प्रमाणपत्र मिलने के बाद उसी स्थान पर नई एक्स-रे मशीन स्थापित कर चालू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में अभी एक सप्ताह से दस दिन तक का समय लग सकता है।