नशे को कहो ना, सपनों को दो उड़ान: टिब्बी विद्यालय में विधिक जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने लिया नशामुक्ति का संकल्प

टिब्बी स्कूल में 'ट्रांसफॉर्मिंग ट्यूजडेज' अभियान, बच्चों को नशे से दूर रहने की सीख

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टिब्बी (सच कहूं/अंकित वधवा)। Tibbi News: राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार "ट्रांसफॉर्मिंग ट्यूजडेज" अभियान के तहत मंगलवार को राजकीय महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, टिब्बी में कानूनी साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। "नशे को ना कहो, अपने सपनों को हाँ कहो" विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें सुरक्षित, स्वस्थ और अपराधमुक्त भविष्य के लिए प्रेरित करना था।

 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तालुका विधिक सेवा समिति, टिब्बी के अध्यक्ष एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तुषार बिश्नोई रहे, जबकि अध्यक्षता सीबीईओ राजेश अरोड़ा ने की। एसीजेएम तुषार बिश्नोई के विद्यालय पहुंचने पर विद्यार्थियों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। इसके बाद सीबीईओ राजेश अरोड़ा, प्रधानाचार्य जगदीश कुमार एवं शिक्षकों ने माला और साफा पहनाकर उनका अभिनंदन किया।

अपने संबोधन में एसीजेएम तुषार बिश्नोई ने कहा कि जिज्ञासा, गलत संगत, साथियों के दबाव, तनाव और सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण कई बच्चे नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि जीवन को बर्बाद करने वाली गंभीर सामाजिक बुराई है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि पहली बार नशा करने से भी मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इससे सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। लंबे समय तक नशे का सेवन लीवर, किडनी, फेफड़ों और मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

बिश्नोई ने विद्यार्थियों को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की जानकारी देते हुए बताया कि नशीले पदार्थों की खरीद, बिक्री, तस्करी, सेवन और भंडारण कानूनन अपराध है तथा इसमें कठोर सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे को बहला-फुसलाकर या दबाव बनाकर नशे की ओर धकेला जाता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे की प्रारंभिक पहचान, उससे बचाव, गलत संगत से दूरी बनाए रखने, सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से सतर्क रहने तथा किसी भी प्रकार का नशा ऑफर होने पर स्पष्ट रूप से "ना" कहने की सीख दी गई। साथ ही बताया गया कि यदि कोई बच्चा नशे की लत का शिकार हो जाए तो उसे डांटने के बजाय परामर्श, चिकित्सकीय सहायता और पुनर्वास के माध्यम से सामान्य जीवन में वापस लाया जा सकता है।

एसीजेएम ने राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता और हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि प्रत्येक बच्चे का अधिकार है कि वह सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करे और अपने सपनों को साकार करे।विद्यालय में "कोर्ट वाली दीदी" के नाम से सुझाव पेटिका स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि इस पेटिका की न्यायालय की ओर से नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी, ताकि बच्चों की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से नशामुक्त जीवन जीने, दूसरों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा स्वस्थ, सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया। एसीजेएम तुषार बिश्नोई ने विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई। सभी विद्यार्थियों ने स्वयं नशे से दूर रहने, दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा स्वस्थ, सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया। अंत में सीबीईओ राजेश अरोड़ा ने एसीजेएम तुषार बिश्नोई का आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से नशे से दूर रहकर उज्ज्वल भविष्य बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर रितु सहू, ओमप्रकाश चारण, अधिकार मित्र प्रभु राम, न्यायालय से लिपिक मुकेश कुमार, विद्यालय स्टाफ व स्टूडेंट्स मौजूद रहे।

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