महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में तैयार दो आयुर्वेदिक डिवाइस को भारत सरकार का मिला पेटेंट

मानसिक रोगों एवं घुटना दर्द में यंत्रों द्वारा मिल रही राहत

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जयपुर। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल  (Mahatma Gandhi Medical College)के नेचुरोपेथी विशेषज्ञ ने आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी नवाचार करते हुए शिरोधारा और जानूबस्ती जैसी उपचार प्रक्रियाओं को यांत्रिक रूप देकर इनका पेटेंट कराया है। ऐसा राज्य में पहली बार हुआ है। नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि शिरोधारा हजारों साल पुरानी आयुर्वेदिक रिलेक्सिंग पद्धति है। Jaipur News

इसमें औषधीय तरल से सिरदर्द, अनिद्रा, मनोरोग आदि से प्रभावी रोगियों को उपचारित किया जाता रहा हैं किंतु इस पेटेंट फॉर्मूला के तहत ब्रेन रिलेक्सिंग थेरेपी डिवाइस विकसित की गई है जिसमें अरोमा थेरेपी, म्यूजिक थेरेपी, मसाज थेरेपी का समावेश करते हुए स्वचालित यंत्र विकसित किया गया है। इसमें उपचार के दौरान तरल का तापमान, पल्स, ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, ऑक्सीजन लेवल की मॉनिटरिंग भी की जाती है।

अब तक सैकड़ों मरीजों को इसका लाभ मिल चुका है।  डॉ मनोज के अनुसार निधारा नामक एक अन्य यंत्र विकसित किया गया। जिसे पुरानी आयुर्वेदिक पद्धति में जानूबस्ती कहा जाता था। इसमें पहले आटे का एक चक्र दर्द प्रभावित घुटने पर लगाया जाता था जिसमें औषधीय तेल भरकर जोड़ में चिकनाहट पहुंचाई जाती थी। समस्या यह होती थी कि गर्म तेल का तापमान थोड़ी देर में कम हो जाता था साथ ही लीकेज भी हो जाता था। इस प्रक्रिया के लिए स्वचालित यंत्र तैयार किया गया है।

इसमें तेल की अनवरत धारा के साथ  इंफ्रा रेड, मसाज, तापमान नियंत्रण का समावेश किया गया है। इस प्रक्रिया को एक सप्ताह तक प्रतिदिन बीस मिनट करने से घुटना दर्द में राहत मिलती है। डॉ मनोज ने बताया कि आयुर्वेद प्रक्रिया को स्वचालित यंत्र   द्वारा किए जाने की उपलब्धि के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा उनके द्वारा तैयार किए गए इन दोनों यंत्रों को पेटेंट प्रमाण पत्र प्रदान किया है। हाल ही में उन्हें इस नवाचार के लिए राज्य सरकार द्वारा आई- स्टार्ट अप योजना के तहत सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि की आयुर्वेदिक चिकित्सा क्षेत्र में सराहना की जा रही है। Jaipur News

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