FD Scheme: बैंक ग्राहकों के लिए खुशखबरी, भारतीय स्टेट बैंक की इस स्कीम में डबल हो जाएंगे आपके पैसे

Published On

SBI Special Scheme: भारतीय स्टेट बैंक हर बार अपने ग्राहकों के लिए एक से बढ़कर एक योजनाएं लेकर आता है। दरअसल स्टेट बैंक एक ऐसी स्कीम चला रहा हैं, जिसमें निवेश करने पर ग्राहकों का पैसा डबल हो जाएगा। यह क फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम हैं। आपको बता दे कि मार्केट में निवेश के भले ही कई विकल्प मौजूद हो, लेकिन अभी भी कई लोगों की पहली पसंद एफडी ही है। अगर आप भी किसी ऐसे ही निवेश की तलाश कर रहे है, जिसमें एक तय समय के बाद आपका पैसा डबल हो जाए तो SBI की ये स्कीम आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। FD Scheme

कई विक्ल्प मौजूद है

SBI अपने ग्राहकों को FD के अलग-अलग टेन्योर के कई विकल्प देती है, जिसमें 7 दिन की FD से लेकर 10 साल तक की FD शामिल हैं। बैंक 3 फीसदी से लेकर के 6.5 फीसदी ब्याज दर से भी FD की सुविधा दे रहा है, इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को FD पर ब्याज 3.5 प्रतिशत से लेकर 7.5 प्रतिशत तक दिया जा रहा हैं।

MODI GOVERNMENT: सरकारी कर्मचारियों को मोदी सरकार देने जा रही है ये बड़ा तोहफा!

कैसे होगा आपका पैसा डबल?

यदि आप भारतीय स्टेट बैंक में 10 साल तक के लिए एक लाख रुपये की एफड़ी कराते है तो मैच्योरिटी के समय आपको जमा राशी से दोगुना रिटर्न मिलेगा। इस निवेश पर 6.5 फीसदी की दर से ब्याज दिया जाता है। निवेशकों को 10 साल में लगभग 1,90,555 रुपये मिलेंगे।
जानकारी के लिए बता दे कि सीनियर सिटीजन को इस 10 साल के लिए FD पर 7.5 प्रतिशत का ब्याज दिया जाता है, यानी सीनियर सिटिजन 10 साल के लिए एक लाख रुपये निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर 2,10,234 रुपये का मुनाफा मिलेगा। इस राशि में 1,10,234 रुपये की ब्याज की आय शामिल है।

5 लाख तक डिपॉजिट है इश्योर्ड

अगर आप बैंक ग्राहक हैं तो आपको ये जरूर मालूम होना चाहिए कि अगर आपका बैंक डिफॉल्ट करता है या डूब जाए तो आपको बैंक में जमा रकम पर 5 जाख रुपए तक का इंश्योरेंस कवर मिलता है। यह रकम कस्टमर को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पेरेशन की ओर से दी जाती है। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पेरेशन रिजर्व बैंक के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है।

डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पेरेशन देश के बैंकों का इंश्योरेंस करता हैं। पहले इस एक्ट के तहत बैंक डूबने या बैंकरप्ट होने की स्थिति में एक लाख रुपए तक की राशि दी जाती थी, लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाकर 5 लाख कर दिया है। भारत में जिन विदेशी बैंकों की शाखाएं है , वो भी इसके दायरे में आती है।

About The Author

Related Posts