आज से ऑनलाइन व ऑफलाइन शिक्षा टीचरों के लिए चुनौती

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बच्चे और अभिभावक भी असमंजस में

  • अध्यापकों को करनी होगी दोहरी मेहनत

गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)। कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन के चलते शुक्रवार से गुरुग्राम समेत पूरे हरियाणा में स्कूल खुल रहे हैं। स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षकों के लिए असमंजस की स्थिति बन रही है। यह जरूरी नहीं कि सभी बच्चे स्कूलों में पहुंच पाएं, इसलिए शिक्षकों को ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन भी कक्षाएं लगानी होंगी। यानी उनके लिए यह दोहरी मेहनत होगी। इस पर हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने कहा है कि सरकार की कार्यप्रणाली से शिक्षकों व छात्रों दोनों का नुकसान हो रहा है।

शुक्रवार से शुरू हो रहे स्कूलों में शत-प्रतिशत बच्चों की हाजिरी हो, यह जरूरी नहीं है। बच्चों को स्कूलों में भेजने से पूर्व अभिभावकों द्वारा फार्म भरकर अपनी सहमति देनी है। शिक्षा विभाग की ओर से इस फार्म अनुमति पत्र नाम दिया गया है। बिना यह फार्म जमा कराए बच्चों को स्कूलों में एक बार तो प्रवेश दे दिया जाएगा, लेकिन उन्हें अगले दिन फार्म जरूर लाने को कहा जाएगा।

हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य उप-प्रधान सत्यनारायण यादव के मुताबिक ऑनलाइन पढ़ाई का बच्चों को कोई विशेष फायदा नहीं हो रहा। जो पढ़ाई स्कूल की कक्षा में होती है, वह ऑनलाइन तरीके से नहीं कराई जा सकती। सरकार कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रही है। उन्होंने कहा कि एक ही तरीके से पढ़ाई कराई जाए, ताकि बच्चों को भी फायदा हो। अब स्कूलों में ऑनलाइन व ऑफलाइन तरीके से पढ़ाई कराना मजबूरी होगी, जो कि शिक्षकों के लिए बहुत मुश्किल काम है। बजघेड़ा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हिंदी अध्यापक एवं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित मनोज कुमार लाकड़ा कहते हैं कि इसमें ऑनलाइन व फिजिकल पढ़ाई से बच्चे और शिक्षकों पर असर पड़ेगा। शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाने के साथ बच्चों को ऑनलाइन पाठ्य सामग्री भेजनी है। जो बच्चे स्कूल में आएंगे, उनको टीचर शुरू से पढ़ाएंगे। जो ऑनलाइन पढ़ाई करवा चुके हैं, उसे रिवाइज भी कराना होगा।

जैकबपुरा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सुनील शर्मा का कहना है कि शिक्षकों को कक्षा व ऑनलाइन पढ़ाई को सामंजस्य बिठाना पड़ेगा, ताकि दोनों तरफ से पढ़ाई सुचारू रूप से कराई जा सके। हालांकि इससे अध्यापकों पर बोझ बढ़ेगा।

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