सावधानी से करने होंगे दैनिक क्रियाकलाप

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Coronavirus

देश में कोविड मरीजों की गिनती एक लाख से नीचे आ गई है, साथ ही कई राज्यों में पाबंदियों पर ढील दी जा रही है। व्यापारी, दुकानदार और आम लोग राहत महसूस कर रहे हैं लेकिन जिस प्रकार बाजारों में भीड़ बढ़ रही है वह काफी खतरनाक साबित हो सकती है। भले ही सरकार ने कई पाबंदियों को जारी रखा हुआ है फिर भी यहां जनता के कार्य व्यवहार पर बहुत कुछ निर्भर करता है। अनलॉक को आजादी न समझकर धीरज से दैनिक क्रियाकलाप चलाने की आवश्यकता है। दूसरी लहर के दौरान हुए देश व जन का नुक्सान भी याद रखा जाए। दूसरी लहर से पहले बाजारों में भीड़, राजनीतिक रैलियां, धार्मिक इक्ट्ठ सहित बहुत कुछ हुआ एवं नए मरीजों की गिनती प्रतिदिन चार लाख से अधिक पहुंच गई थी। अब फिर राजनीतिक दल अपनी आदत नहीं छोड़ पा रहे, पहले जैसी गतिविधियां कर रहे हैं।

गत दिवस पंजाब में विपक्षी दल के नेताओं पर धरने में इकट्ठ कर नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। धरने की तस्वीरों में नजर आ रही भीड़ और आपसी दूूरी के नियम का उल्लंघन वास्तव में बीमारी को न्यौता देने वाली है। हैरानी की बात यह है कि जो नेता सरकार पर कोरोना रोकथाम के लिए प्रबंधों की कमी का आरोप लगाते रहे वही नेता धरना देते नजर आए। यह सच है कि राजनेताओं को भी कोरोना हो सकता है, हुआ भी है और कई नेताओं की मौत भी हुई है। नेता भीड़ इक्ट्ठी कर न चाहते हुए भी बीमारी फैलने का कारण बन जाते हैं। दरअसल परिस्थितियों के मद्देनजर नेताओं को धरने-प्रदर्शनों का विकल्प ढूंढना चाहिए। आवश्यक नहीं कि जनता की आवाज धरने के द्वारा ही सरकार तक पहुंचे।

यदि विपक्ष के विचार उचित और बात तथ्यों पर अधारित होंगे, तब समाचार-पत्रों में प्रकाशित और टीवी पर बोली गई एक बात भी पूरे देश में फैल जाती है। विरोध करने का सभी को अधिकार है लेकिन विरोध करने की विधि और समय अब देखा जाना चाहिए। यह भी आवश्यक है कि सरकारें केवल विरोधियों को ही निशाने पर लेने की बजाय निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करें। सत्तापक्ष की पार्टियों के खिलाफ भी कार्रवाई बनती है जिन्होंने गैर-कानूनी तौर पर इक्ट्ठ किए। पंजाब के शहर बठिंडा में सत्तापक्ष द्वारा नगर पार्षदों की एक होटल में भीड़ के रूप में पार्टी करते हुए, तस्वीरें मीडिया में वायरल हुर्इं, लेकिन मामला अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुआ। ऐसा भेदभाव आम जनता में कानून के प्रति विश्वास को कमजोर करता है। जनता को भी चाहिए कि फिलहाल जरूरत पड़ने पर ही वे बाजार जाएं। कोरोना गया नहीं है अत: सावधानी रखनी होगी।

 

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