मरकर भी इंसानियत के काम आए धर्मपाल गिरधर इन्सां

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Body Donation Sachkahoon

मृत शरीर पर गजरौला मेडिकल कॉलेज हापुड़ के भावी डॉक्टर करेंगे रिसर्च

  • पूज्य माता करतार कौर जी इंटरनेशनल आई बैंक में दान की आंखें, अंधेरी जिंदगियों को करेगी रोशन

सरसा (सच कहूँ न्यूज)। लेकर कहां कुछ वापिस जाना है, यह शरीर भी अब दान है, यह शरीर भी अब दान है…। जी हां डेरा सच्चा सौदा की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए डेरा अनुयायी इन पंक्तियों को वास्तविक अर्थों में चरितार्थ कर रहे है। इसी कड़ी में गत दिवस ब्लॉक सरसा के अनथक सेवादार एवं 15 मैम्बर हैप्पी गिरधर इन्सां के पिता धर्मपाल गिरधर इन्सां (62) अपनी श्वासों रूपी पूंजी पूरी करके कुल मालिक के चरणों में सचखंड जा विराजे। उनके मरणोपरांत उनके पारिवारिक सदस्यों ने उनकी पार्थिव देह को मेडिकल रिसर्च के लिए उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित गजरौला मेडिकल कॉलेज को दान किया गया।

जबकि उनकी आंखें शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल स्थित पूज्य माता करतार कौर जी इंटरनेशनल आई बैंक में दान की गई। उनके इस पुनित कार्य की समस्त मौहल्लावासियों ने सराहना की है। दरअसल कीर्ति नगर निवासी सरसा ब्लॉक के 15 मैम्बर हैप्पी गिरधर इन्सां व नरेश गिरधर इन्सां के पिता धर्मपाल गिरधर इन्सां ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए मरणोपरांत शरीरदान व नेत्रदान का लिखित में संकल्प लिया हुआ था।

शरीरदानी धर्मपाल गिरधर इन्सां अमर रहे…

कीर्ति नगर गली नंबर 6 से विनती का शब्द बोलकर उनकी पार्थिव देह को फूलों से सजी एंबुलेंस में रख कर शाह सतनाम जी चौक तक उनकी शव यात्रा निकाली गई। इस दौरान उपस्थित शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के सैंकड़ों महिला एवं पुरुष सेवादारों ने शरीरदानी धर्मपाल इन्सां अमर रहेझ् के नारे लगाए। इसके पश्चात शाह सतनाम जी चौक से मृतक देह को मेडिकल कॉलेज के लिए नम आंखों से रुखसत किया गया।

सचखंडवासी ने पूजनीय परम पिता जी से लिया था गुरुमंत्र

सरसा ब्लॉक भंगीदास कस्तूर सोनी इन्सां ने बताया कि सचखंडवासी धर्मपाल इन्सां का पूरा परिवार डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा हुआ है। धर्मपाल इन्सां ने परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से गुरुमंत्र प्राप्त किया था। इसके पश्चात उन्होंने अपने पूरे परिवार को डेरा सच्चा सौदा के साथ जोड़ा। सचखंडवासी के पुत्र हैप्पी गिरधर इन्सां सरसा ब्लॉक में 15 मैम्बर की सेवा निभा रहे है और हर समय मानवता भलाई कार्यो में अग्रणी रहते है। सचंखडवासी मरणोपरांत भी नेत्रदान व शरीरदान कर मानवता पर बहुत बड़ा उपकार कर गए।

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