हमसे जुड़े

Follow us

33.5 C
Chandigarh
Monday, April 20, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय क्या भारत को ...

    क्या भारत को युद्ध में घसीटना चाहता है चालबाज चीन?

    War with India

    भारत-चीन के बीच की झड़पों पर अभी तनाव भले कितना भी हो लेकिन भारत को यह जरूर सोचना चाहिए कि कहीं चीन उसे युद्ध में घसीटना तो नहीं चाह रहा। चीन अपनी तरफ से दुनिया को भ्रमित कर रहा है कि भारत ने सीमा लांघी और चीनी सैनिकों के कैंप को उखाड़ा, चीन ने जो किया अपने बचाव में किया। चीन की इस बात पर पाकिस्तानी मीडिया व नेपाली मीडिया भी भारत को जिम्मेवार ठहराने के लिए अपना गला फाड़ रहे हैं। भारत को जो जख्म मिला है इसमें पूर्णत सरकार व खुफिया तंत्र की विफलता है। नरेन्द्र मोदी सरकार के प्रचार में बातों को बहुत बढ़ा चढ़ाकर पेश करने पर जोर है, तभी आए दिन पाकिस्तान के नाम पर ये सरकार बहुत बड़ी सूरमा बनी हुई थी, सरकार की सूरमाई में कूटनीति, चौकन्ना पन्न सब गायब थे।

    चीन की छोड़िए पाकिस्तान ने उड़ी व पुलवामा में हमारे खुफिया तंत्र की विफलता का फायदा उठाया। अभी लद्दाख में चरवाहे सेना को बता रहे हैं, सेना के तकनीकी टोही, मानव टोही कहीं न कहीं लापरवाह रहे। अगर भारत सरकार अपने इसी खुफिया तंत्र के भरोसे युद्ध के मैदान में उतरने का सोच रही है तब यह ज्यादा आत्मघाती कदम होगा। निश्चित तौर पर चीन की मंशा देश को युद्ध में घसीटने की है चूंकि चीन जानता है कि पाकिस्तान व नेपाल को वह पूरी तरह अपनी तरफ किए हुए है। पाकिस्तान तो हमारे से पहले ही अघोषित युद्ध लड़ रहा है, अगर भारत-चीन से लड़ेगा तब शेरों की लड़ाई में सियार (पाकिस्तान) गोश्त (कश्मीर) उड़ाने की कोशिशें जरूर करेगा। भारत को अमेरिका चीन के सम्बन्धों पर भी अपनी एकतरफा राय कायम नहीं करनी चाहिए।

    अमेरिका-चीन दोनों ही व्यापारिक शक्तियां हैं, अमेरिकी विदेश मंत्री माईक पोम्पियों की चीनी शीर्ष राजनयिक यांग जिची के साथ हवाई में चली सात घंटें की बातचीत साफ जाहिर करती है कि दोनों कोरोना महामारी में हुए अपने-अपने आर्थिक नफे-नुक्सान की सौदेबाजी कर रहे होंगे। भारत को जो करना होगा पहले अपने दम पर करना होगा। भारत 133 करोड़ लोगों का देश है, भारत को नीति बनानी होगी कि आने वाले हजारों साल तक चीनी माल नहीं खरीदना व चीन पर कभी भी कोई भरोसा नहीं करना। भारत को जापान, आस्ट्रेलिया, ताईवान, अमेरिका से भी आर्थिक सौदेबाजी करनी चाहिए कि वह भारत से व्यापार में चीन को प्रमुखता नहीं देंगे। भारत की आर्थिक नीतियों से यहां देश मजबूत होगा वहीं दुश्मन चीन का नुक्सान होगा। भारत को चीन की तरह अब मौकों की तलाश में रहना होगा ताकि वह मौका मिलते ही देश के एक-एक सैनिक की शहादत का हिसाब चीन से चुकता कर सके।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।