नरमें में उखेड़ा रोग ने दी दस्तक

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Crop-of-Narma

चिंतित किसान महंगे कीटनाशकों का अंधाधुंध कर रहे छिड़काव

(Crop of Narma)

  • बरसात के बाद फसलों में आ रही समस्या

सच कहूँ/राजू
ओढां। विगत वर्ष की अपेक्षा इस बार खरीफ की फसल किसानों की उम्मीदों के अनुकूल है, लेकिन पिछले एक सप्ताह के अंतराल में हुई बरसात के चलते नरमें की फसल में उखेड़ा रोग की दस्तक देखी जा रही है। ऐसे में चिंतित किसान कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर दे रहे हैं। ये समस्या उन क्षेत्रों में ज्यादा देखी जा रही है जहां ट्यूबवैलों का पानी खारा है और नहरी पानी की किल्लत है। उखेड़ा रोग की वजह से पौधा मुरझाकर खत्म हो जाता है। जिसके बाद ये आगे फैलकर पूरी फसल को नष्ट कर देता है। ओढां, रामनगर, रोहिड़ांवाली, सालमखेड़ा, जलालआना व ख्योवाली सहित कुछ अन्य गांवों में इस रोग का प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। फसल को इस रोग से बचाने के लिए किसान महंगे कीटनाशकों का अंधाधुंध छिड़काव कर रहे हैं। कृषि अधिकारियों के मुताबिक किसान अंधाधुंध छिड़काव से बचें। इस बारे कृषि विशेषज्ञों से जानकारी अवश्य लें।

जड़ गलन में पौधा मुरझाकर 24 घंटे में हो जाता है नष्ट

कृषि विभाग के ओढां खंड के सहायक तकनीक प्रबंधक रमेश सहु ने बताया कि उनके पास पिछले 3-4 दिनों से किसानों के फोन आ रहे हैं कि खेतों में उखेड़ा रोग की समस्या आ रही है। अधिकारी ने बताया कि उखेड़ा एक फंगस की बीमारी है। जोकि बरसात के बाद खारे पानी वाले क्षेत्रों में अधिक नजर आती है। इसे उखेड़ा या बिल्ट कहा जाता है। ये रोग जड़ गलन से थोड़ा अलग है। जड़ गलन में पौधा ऊपर से नीचे की तरफ मुरझाकर 24 घंटे में नष्ट हो जाता है। इसके अलावा पौधे की जडंÞे गल जाती है और उसकी छाल आसानी से उतर जाती है। जबकि उखेड़ा रोग में पौधे के नीचे की पत्तियां पीली पड़कर गिरने लग जाती है और फिर ऊपर की तरफ से पौधे का भाग नष्ट हो जाता है।

किसान ऐसे कर सकते हैं बचाव

अधिकारी ने बताया कि पौधे की जड़ों को उखाड़कर उसे चीरकर देखा जाए तो उसमें भूरे रंग की धारियां नजर आती है। उक्त धारियां पौधे की खुराक को ऊपर की तरफ नहीं जाने देती। इसी का कारण है कि पौधा नष्ट हो जाता है। अधिकारी ने इस रोग की रोकथाम के लिए उपचार बताते हुए कहा कि बरसात के बाद नरमें की फसल में 2 ग्राम कोबाल्ट क्लोराइड का 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। या फिर 250 से 300 एमएल रोको (थायोफिनेट मिथाइल) नामक दवा को 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इस छिड़काव से किसान उखेड़ा रोग को नियंत्रित कर सकते हैं।

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