परमवीर विक्रम की कहानी: बुरी तरह घायल होने के बाद भी मार गिराए थे पांच दुश्मन
भारत माता के वीर सपूत शही...
प्रेरणास्त्रोत: गुरु नानक की करुणा
सेठ ने आश्चर्य का पार न रहा। हाथ जोड़कर बोला- ‘‘गुरुदेव! आप क्या कह रहे हैं?
परलोक में तो मनुष्य कुछ भी नहीं ले जा सकता। सब यहीं का यहीं धरा रह जाता है।’’
आंदोलनों की भेंंट चढ़ती सार्वजनिक संपत्ति
आखिर देश का आम नागरिक कब तक आंदोलनों के आगे लाचार होता रहेगा। भले ही बात कितनी भी गंभीर हो पर हिंसा उसका जबाव नहीं हो सकता। हांलाकि 2017 के सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पहुंचाने के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो साफ हो जाता है


























