India-Pakistan: पाकिस्तान को भारत की खरी-खरी

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India-Pakistan: शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत सरकार ने आतंकवाद के मुद्दा को मुखरता से उठाया। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी भाग ले रहे हैं। चीन और पाकिस्तान के शासक वर्चुअल रूप में भाग ले रहे हैं। इन दोनों देशों की उपस्थिति में भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा उठाना अहम है। भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिया बिना उसे स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जब तक वो (पाकिस्तान) अपनी धरती पर और अपनी विदेश नीति में आतंकवाद का समर्थन करता रहेगा, तब तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद के आरोपों का सामना करना पड़ेगा। India-Pakistan

दरअसल, पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री बन गया है, जिससे भारत के साथ-साथ खुद पाकिस्तान को भी नुकसान हो रहा है। आतंकवाद के कारण पाक आर्थिक रूप से बर्बाद हो रहा है। पाक के कुछ नेता भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि आतंकवाद और सेना की तानाशाही के चलते देश बर्बाद हो रहा है। पाक को अतीत में झांक कर देखना चाहिए कि भारत ने आतंकवाद के मामले में अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर नरम रुख नहीं अपनाया है। विगत वर्षों में दो सर्जिकल स्ट्राइकलों ने पाक को स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसी भी कीमत पर आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। India-Pakistan

साथ ही भारत विश्व के शक्तिशाली देशों के बिना दबाव में एक समान शक्ति के रूप में उभर रहा है। आर्थिक दृष्टि से रूस और अमेरिका जैसे देश भी भारत से मित्रता को अपने हित में समझ रहे हैं। इसी तरह चीन को भी यह संदेश दिया गया है कि आतंक को पालने वाले देश से संबंध बनाकर वह अपनी प्रतिष्ठा को मजबूत नहीं कर सकता। यदि पाकिस्तान भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित कर चलता तो दोनों देशों को व्यापार में लाभ पहुंचता। वहीं पाकिस्तान को महंगाई का सामना भी नहीं करना पड़ता। पाक को यह समझना चाहिए कि मित्र बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। India-Pakistan

पाक शासकों को चाहिए कि वे आतंकवाद को पनाह देने की बजाए बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल बनाएं। सीमाओं पर शांति बहाल के बिना बातचीत असंभव है। एससीओ, सार्क जैसे सम्मेलनों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब सदस्य देशों में वास्तविकताओं को स्वीकार कर बेहतरी के लिए उचित कदम उठाने का साहस दिखाएंगे।