एक ही घर में रहने वालों को क्यों होती हैं अलग-अलग बीमारियां? AIIMS दिल्ली 200 परिवारों पर करेगा 4 साल तक रिसर्च, खुलेगा सेहत का बड़ा राज
एक ही घर में रहने वालों को क्यों होती हैं अलग-अलग बीमारियां? AIIMS दिल्ली 200 परिवारों पर करेगा 4 साल तक रिसर्च, खुलेगा सेहत का बड़ा राज
AIIMS Delhi Research: एक ही घर में रहने वाले लोग, एक जैसा खाना और लगभग एक जैसा माहौल होने के बावजूद अलग-अलग बीमारियों का शिकार क्यों हो जाते हैं? किसी परिवार में एक सदस्य डायबिटीज से परेशान है, तो दूसरे को दिल की बीमारी हो जाती है। वहीं, कुछ लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ता है, जबकि परिवार के अन्य सदस्य पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं। आखिर एक ही परिवार के लोगों की सेहत में इतना अंतर क्यों होता है? इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक खास रिसर्च शुरू की है। इस अध्ययन के जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि जेनेटिक्स, खान-पान, लाइफस्टाइल और आसपास का वातावरण इंसान की सेहत को किस तरह प्रभावित करते हैं।
200 परिवारों पर 4 साल तक चलेगी रिसर्च
एम्स दिल्ली के इस महत्वाकांक्षी रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत देशभर के करीब 200 परिवारों को अध्ययन के लिए चुना जाएगा। इन परिवारों के अलग-अलग सदस्यों की सेहत पर लगभग 4 साल तक नजर रखी जाएगी।
इस दौरान शोधकर्ताओं की टीम परिवारों के खान-पान, रहन-सहन, शारीरिक गतिविधियों, नींद और स्वास्थ्य से जुड़ी आदतों का बारीकी से अध्ययन करेगी। समय-समय पर उनकी मेडिकल जांच भी की जाएगी।
इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि एक ही परिवार और लगभग समान वातावरण में रहने के बावजूद लोगों के शरीर में बीमारियों का खतरा अलग-अलग क्यों होता है।
जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल और वातावरण का क्या है कनेक्शन?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति की सेहत पर मुख्य रूप से तीन चीजों का प्रभाव पड़ता है। इनमें जेनेटिक्स यानी आनुवंशिक बनावट, लाइफस्टाइल और एनवायरमेंट यानी आसपास का वातावरण शामिल हैं।
एम्स के वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि परिवार के सदस्यों की आनुवंशिक बनावट में समानताएं होने के बावजूद उनके शरीर की प्रतिक्रिया अलग-अलग क्यों होती है।
रिसर्च में इन बातों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है:
- जेनेटिक्स: किसी व्यक्ति के DNA में मौजूद बदलाव बीमारियों के जोखिम को किस तरह प्रभावित करते हैं।
- खान-पान: एक जैसा भोजन करने के बावजूद अलग-अलग लोगों के शरीर पर उसका असर अलग क्यों होता है।
- मानसिक तनाव: काम का दबाव और लगातार तनाव स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित करते हैं।
- नींद का पैटर्न: कम या अनियमित नींद का बीमारियों से क्या संबंध है।
- शारीरिक गतिविधि: व्यायाम और रोजाना की गतिविधियों में अंतर से सेहत पर क्या असर पड़ता है।
- बचपन का वातावरण: शुरुआती जीवन में खान-पान और आसपास के माहौल का आगे चलकर स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।
ब्लड टेस्ट और जेनेटिक जांच से जुटाया जाएगा डेटा
इस चार साल की रिसर्च के दौरान चयनित परिवारों के सदस्यों की अलग-अलग मेडिकल जांच की जाएगी। इसमें ब्लड टेस्ट, जेनेटिक सीक्वेंसिंग और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच शामिल हो सकती हैं।
इन जांचों के जरिए वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि शरीर में मौजूद कौन से आनुवंशिक बदलाव और जैविक प्रक्रियाएं किसी व्यक्ति को खास बीमारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाती हैं।
इसके अलावा, शोधकर्ता परिवार के सदस्यों की जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का भी विश्लेषण करेंगे। इस तरह एक विस्तृत हेल्थ डेटा बैंक तैयार करने में मदद मिल सकती है।
डायबिटीज से लेकर कैंसर तक, बीमारियों के कारण समझने में मिलेगी मदद
इस रिसर्च से भारतीय आबादी में होने वाली कई गंभीर और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, थायराइड और दिल की बीमारियों के जोखिम को समझने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य और तनाव से जुड़े पहलुओं का भी अध्ययन महत्वपूर्ण होगा।
वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि किन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति में बीमारी विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है और किन कारणों से परिवार का दूसरा सदस्य उसी माहौल में रहने के बावजूद स्वस्थ रहता है।
भविष्य में बीमारियों की रोकथाम में मिल सकती है मदद
एम्स की यह रिसर्च भविष्य में बीमारियों की पहचान और रोकथाम के नए रास्ते खोल सकती है। अगर वैज्ञानिक यह समझने में सफल होते हैं कि एक ही परिवार के लोगों में बीमारियों का जोखिम अलग-अलग क्यों होता है, तो भविष्य में व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट और जीवनशैली के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
इससे मरीजों के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य योजनाएं बनाने और बीमारी का खतरा बढ़ने से पहले जरूरी सावधानियां अपनाने में भी मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, एम्स दिल्ली की यह चार साल की रिसर्च इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है कि एक ही घर, एक जैसा खान-पान और समान वातावरण होने के बावजूद हर व्यक्ति की सेहत अलग क्यों होती है। इस अध्ययन के नतीजे भविष्य में भारतीय परिवारों के स्वास्थ्य को समझने और बीमारियों से बचाव की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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