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World Refugee Day 2026: किस देश में सबसे ज्यादा रहते हैं रिफ्यूजी? जानिए भारत किस नंबर पर है
World Refugee Day 2026: किस देश में सबसे ज्यादा रहते हैं रिफ्यूजी? जानिए भारत किस नंबर पर है
World Refugee Day 2026: हर साल 20 जून को विश्वभर में वर्ल्ड रिफ्यूजी डे (World Refugee Day) मनाया जाता है। यह दिन उन करोड़ों लोगों के साहस, संघर्ष और धैर्य को सम्मान देने के लिए समर्पित है, जिन्हें युद्ध, हिंसा, उत्पीड़न, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य गंभीर परिस्थितियों के कारण अपना घर और देश छोड़ना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2000 में इस दिवस को आधिकारिक मान्यता दी थी और पहली बार इसे वर्ष 2001 में वैश्विक स्तर पर मनाया गया।
2026 की थीम क्या है? World Refugee Day 2026
वर्ल्ड रिफ्यूजी डे 2026 की थीम “Until Everyone Is Safe” रखी गई है। इसका संदेश है कि जब तक दुनिया का हर व्यक्ति सुरक्षित नहीं है, तब तक मानवता की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। यह थीम शरण मांगने के अधिकार और विस्थापित लोगों की सुरक्षा पर विशेष जोर देती है।
दुनिया में कितने लोग हैं विस्थापित?
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वर्तमान में दुनिया भर में 11.7 करोड़ (117 मिलियन) से अधिक लोग जबरन विस्थापन का सामना कर रहे हैं। इनमें युद्ध, हिंसा, राजनीतिक संकट और उत्पीड़न के कारण अपने घर छोड़ने वाले लोग शामिल हैं। सूडान, यूक्रेन, अफगानिस्तान, सीरिया, म्यांमार और कांगो जैसे देशों से बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।
रिफ्यूजी किसे कहा जाता है?
1951 की शरणार्थी संधि के अनुसार रिफ्यूजी वह व्यक्ति होता है, जो नस्ल, धर्म, राष्ट्रीयता, सामाजिक समूह की सदस्यता या राजनीतिक विचारों के कारण उत्पीड़न के डर से अपना देश छोड़ने पर मजबूर हो जाता है।
इसके अलावा कुछ अन्य श्रेणियां भी होती हैं—
- Asylum Seekers – जिन्होंने किसी दूसरे देश में शरण मांगी है, लेकिन उनका मामला अभी विचाराधीन है।
- Internally Displaced Persons (IDPs) – जो अपने ही देश के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले गए हैं।
- Stateless Persons – जिनकी किसी भी देश की मान्य नागरिकता नहीं होती।
- Returnees – जो लंबे समय बाद अपने देश वापस लौटते हैं।
किस देश में सबसे ज्यादा रिफ्यूजी रहते हैं?
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में सबसे अधिक शरणार्थियों को आश्रय देने वाले देशों में ईरान, तुर्की, कोलंबिया, जर्मनी और पाकिस्तान शामिल हैं। इन देशों में अफगानिस्तान, सीरिया, यूक्रेन, वेनेजुएला और अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों से आए लाखों लोग रह रहे हैं।
जलवायु संकट भी बन रहा बड़ा कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल युद्ध और हिंसा ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन भी बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापन की वजह बन रहा है। बाढ़, सूखा, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण एशिया और अफ्रीका के कई देशों में लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, चीन, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में जलवायु आपदाओं का असर लगातार बढ़ रहा है। पिछले दशक में जलवायु संबंधी कारणों से विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत किस नंबर पर आता है?
भारत लंबे समय से शरण लेने वाले लोगों को आश्रय देता रहा है। जनवरी 2022 तक भारत में 46 हजार से अधिक रिफ्यूजी रह रहे थे। इनमें सबसे अधिक लोग श्रीलंका और तिब्बत से आए हैं। भारत में रहने वाले रिफ्यूजी समुदाय का अनुमानित वितरण इस प्रकार है—
- 43% – श्रीलंका
- 34% – तिब्बत
- 14% – म्यांमार
- 7% – अफगानिस्तान
- 2% – अन्य देश
हालांकि शरणार्थियों की कुल संख्या के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल नहीं है, फिर भी यहां हजारों विस्थापित लोगों को रहने और जीवनयापन का अवसर मिलता है।