विश्व रक्तदाता दिवस विशेष: ‘ट्रयू ब्लड पंप’ देश-दुनिया में जगाए हुए हैं जिंदगी की मशाल
दुनिया का अनोखा ब्लड सेंटर: पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर
सरसा (सच कहूँ/राजेश बैनीवाल/सुनील वर्मा)। World Blood Donor Day: आज का समय ऐसा है कि अपने ही अपनों के काम नहीं आते वो भी जरूरत पड़ने पर साथ छोड़ ही जाते हैं। लेकिन एक ऐसी संस्था आज इस दुनिया में मानवता की सेवा के लिए हर वक्त मौजूद है वहां के लोग दूसरों को भी अपना मान लेते हैं। और जरूरत पड़ने पर किसी भी मदद से पिछे हटना नहीं जानते। हम बात कर रहे हंै हरियाणा प्रदेश के जिला सरसा स्थित ‘डेरा सच्चा सौदा’ की। यहां पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां वैसे तो मानवता की भलाई के लिए सैकड़ों कार्य चलाए हुए हैं। परन्तु इसी में 28वां काम है ‘रक्तदान’।
पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार रक्तदान के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। इसीलिए पूज्य गुरु जी ने इन सेवादारों को ‘ट्रयू ब्लड पंप’ नाम दिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह ब्लड पंप एक आह्वान पर बच्चे -जवान ही नहीं बुजुर्ग भी बिना कुछ सोचे समझे रक्तदान करने के लिए जिद्द पर अड़ जाते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों द्वारा अब तक लगभग 24 लाख यूनिट खून दान किया जा चुका है।
डेरा सच्चा सौदा का नाम रक्तदान के क्षेत्र में 3 बार गिनिज वर्ल्ड, एशिया लिम्का, इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। यहां पर स्वस्थ, एवं स्वैच्छिक रक्तदाता हर समय देश-विदेश में रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। डेरा सच्चा सौदा ने स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में तीन विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं।
यूं बनते गए स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में रिकॉर्ड
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (7 दिसंबर 2003): मात्र 8 घंटों में 15,432 यूनिट रक्तदान कर पहली बार इतिहास रचा गया।
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (10 अक्टूबर 2004): राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक शिविर के दौरान 17,921 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (8 अगस्त 2010): एक ही दिन में 43,732 यूनिट रक्तदान का सबसे बड़ा रिकॉर्ड।
- एशिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स (23 सितंबर 2011): एक ही दिन में 61,752 लोगों द्वारा नियमित रक्तदान करने का संकल्प लेने का रिकॉर्ड दर्ज है।
- भारतीय सेना, पुलिस, पत्रकार व थैलेसिमिया ग्रस्त मरीजों के लिए पूज्य गुरुजी द्वारा प्राथमिकता से व नि:शुल्क रक्त उपलब्ध करवाने का आहवान किया गया हैै।
- दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 12 अपै्रल 2014 को 75,771 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया वो पल भी किसी कीर्तिमान से कम नहीं है।
क्यों मनाया जाता हैं विश्व रक्तदाता दिवस
हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। रक्तदान के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। पहली बार साल 2004 में मनाया गया था, जिसकी शुरूआत वर्ल्ड हेल्थ आॅर्गेनाइजेशन ने की थी। दरअसल, समय पर रक्त उपलब्ध न होने पर कई मरीज दम तोड़ देते हैं, ऐसे में रक्तदान ऐसे लोगों के लिए जीवनदान बन सकता है, इसलिए लोगों को इसके महत्व से रूबरू कराने के लिए वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है।
दुनिया का अनोखा ब्लड सेंटर: पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर
विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर जब पूरी दुनिया स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान दे रही है, तब सरसा स्थित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल का पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर मानवता सेवा की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जो डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से स्थापित हुआ है। पूज्य गुरुजी द्वारा शुरू की गई रक्तदान मुहिम का ही परिणाम है कि पिछले करीब दो दशकों से यह ब्लड सेंटर जरूरतमंद मरीजों को बिना रिप्लेसमेंट डोनर के रक्त उपलब्ध करवा रहा है।

इतना ही नहीं अपनी तरह के इस अनूठे ब्लड सेंटर में रक्तदान करने के लिए दानियों को इंतजार करना पड़ता है और रक्तदान के बाद वे चिकित्सकों का धन्यवाद कर लौटते हैं। वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक इस ब्लड सेंटर में 2 लाख 3 हजार 753 यूनिट रक्तदान हो चुका है। यहां से 52 हजार 608 यूनिट होल ब्लड, 1 लाख 33 हजार 304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स, 1 लाख 41 हजार 994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, 57 हजार 728 यूनिट प्लेटलेट्स तथा 6 हजार 556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आमतौर पर अस्पतालों में मरीज के परिजनों को रक्त लेने से पहले किसी अन्य व्यक्ति से रक्तदान करवाना पड़ता है, लेकिन यहां व्यवस्था बिल्कुल अलग है। डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं, जिसके कारण ब्लड सेंटर में रक्त की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहती है। यही वजह है कि दुर्घटना, आॅपरेशन अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों और उनके परिजनों को रक्त के लिए भटकना नहीं पड़ता।
किसी भी ब्लड सेंटर की सबसे बड़ी पूंजी उसके नियमित रक्तदाता होते हैं और यही पूंजी इस ब्लड सेंटर को अलग पहचान दिलाती है। पूज्य गुरुजी की प्रेरणा से लाखों अनुयायी वर्षों से रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानते हुए इस अभियान से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि हजारों जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिल सका है और अनगिनत जिंदगियां बचाई जा चुकी हैं। आज जब देशभर में रक्त की मांग लगातार बढ़ रही है, तब सरसा का यह ब्लड सेंटर समाज को यह संदेश दे रहा है कि यदि लोग निस्वार्थ भाव से रक्तदान के लिए आगे आएं तो किसी भी व्यक्ति को रक्त के अभाव में अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी। यही विश्व रक्तदाता दिवस का वास्तविक संदेश है रक्तदान महादान, जीवनदान के समान।
वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक 2,03,753 यूनिट रक्तदान
- 52,608 यूनिट होल ब्लड वितरित
- 1,33,304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स उपलब्ध कराई
- 1,41,994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा वितरित
- 57,728 यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई
- 6,556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) मरीजों को दी गई
रक्तदान का कोई विकल्प नहीं
रक्तदान का कोई विकल्प नहीं है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों का जीवन बचाने में सहायक हो सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक करना और नियमित रक्तदाता बनने के लिए प्रेरित करना है।
— डॉ. प्रदीप अरोड़ा, बीटीओ, पूज्य बापू
मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर सरसा।
प्लेटलेट्स डोनेशन की भी आधुनिक सुविधा
यह ब्लड सेंटर केवल रक्त संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अत्याधुनिक एफेरेसिस मशीन भी उपलब्ध है। इस मशीन के माध्यम से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) तैयार किए जाते हैं। मशीन रक्त से केवल प्लेटलेट्स अलग कर लेती है और शेष रक्त दाता के शरीर में वापस पहुंचा देती है। डेंगू, कैंसर, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए प्लेटलेट्स जीवनरक्षक साबित होते हैं। विशेषकर डेंगू के मौसम में प्लेटलेट्स की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में एफेरेसिस मशीन के माध्यम से तैयार किए जाने वाले सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मरीजों के लिए संजीवनी साबित होते हैं और उन्हें प्लेटलेट्स की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।
