डेढ़ साल के मासूम अयांश को लगेगा 16 करोड़ का टीका

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सोनू सूद सहित कई सेलेब्रिटीज मदद को आए आगे

उपचार को अब तक इकट्ठे हुए साढ़े 4 करोड़ रुपये

सच कहूँ/संजय मेहरा
गुरुग्राम। करीब डेढ़ साल के बालक अयांश की जिंदगी बचाने के लिए 16 करोड़ रुपये का इंजेक्शन लगना है। यह इंजेक्शन खरीदने को फंड जुटाने के लिए अब फिल्मी हस्तियां भी आगे आई हैं। अभिनेता सोनू सूद समेत कई हस्तियों ने वीडियो संदेश जारी करके अयांश का जीवन बचाने को देशवासियों से अपील की है। जॉलगेनसमा नामक यह इंजेक्शन अमेरिका से मंगवाया जाएगा।
अयांश को जॉलगेनसमा नामक एक इंजेक्शन बच्चे को लगेगा, जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपये है। इसे अमेरिका से मंगवाने का खर्च अलग से होंगे। फिल्म अभिनेता एवं प्रसिद्ध समाज सेवी सोनू सूद समेत कई फिल्म सेलिब्रिटी ने अयांश को लगने वाले इंजेक्शन के लिए फंड जुटाने का आग्रह किया है। सोनू सूद का कहना है कि यह रकम बहुत बड़ी है। हम सब मिलकर ही इसे इकट्ठा कर सकते हैं। अभिनेता अवतार गिल की अपील है कि डोनेट करें, ताकि यह बच्चा भी आपके बच्चों और हमारे बच्चों की तरह नॉर्मल जिंदगी जी सके। गीता कपूर कह रही हैं कि अयांश ना उठ सकता है, ना बैठ सकता है। उसे जो बीमारी है, उसका इलाज महंगा है। सिर्फ दो साल तक ही उसे टीका लग सकता है। इसलिए सभी उसकी हेल्प को आगे आएं। अयांश के साथ उनके माता-पिता प्रवीण मदान एवं वंदना मदान ने पहले भी बेटे का जीवन बचाने को देशवासियों से गुहार लगाई है।
चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रही गुरुग्राम की संस्था कैनविन फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. डीपी गोयल व सह-संस्थापक नवीन गोयल ने भी बच्चे का जीवन बचाने को पहल करते हुए अपील की थी। गुरुग्राम व यहां से बाहर रहने वाले आम आदमी के साथ फिल्म व खेल जगत की हस्तियों से अपील की गई थी।

माता-पिता की शारीरिक कमियों से होती है ये बीमारी

चाइल्ड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राकेश जैन के मुताबिक यह जेनेटिक बीमारी है। माता-पिता के जीवन में कमियों की वजह से यह बीमारी बच्चों में आती है। इस बीमारी का नाम एसएमए (स्पाइनल मसक्यूलर एट्रॉफी) है। नसों की यह बीमारी होती है। इसकी तीन श्रेणी टाइप-1, 2 व 3 होती हैं। टाइप-1 बीमारी सबसे घातक और जानलेवा होती। एक साल से कम उम्र के बच्चों में यह बीमारी होती है। टाइप-2 बीमारी होने पर बच्चे जीवित तो रहते हैं, पर जीवन में मुख्यधारा में नहीं आ पाते। टाइप-3 की बीमारी में बच्चों में थोड़ी शारीरिक कमजोरी होती है, लेकिन वे सही जीवन व्यतीत करते हैं। अब तक देश में करीब 150 बच्चे इस बीमारी से ग्रस्त हो चुके हैं। काफी ठीक भी हुए हैं।

 

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