param pita shah satnam ji
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MSG Maha Rahmokaram Month: ‘‘यह सामान किसका है?’’
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By Sach Kahoon Desk
Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) अपने घर का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा सामान पूजनीय साईं जी के हुक्मानुसार डेरे ले आए। अभी भी आप जी की कोई और परीक्षा होनी बाकी रह गई थी। शाम को पूजनीय […]
MSG Maha Rahmokaram Month: दूसरी ओर श्री जलालआणा साहिब का हर व्यक्ति उदास था!
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By Sach Kahoon Desk
Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज को (गुरुगद्दी से पहले) यह संदेश भिजवाया कि हरबंस सिंह (पूजनीय परम पिता जी का बचपन का नाम) अपना मकान ढहा दें और घर का सारा सामान डेरे में लेकर आ जाएँ। आप जी […]
MSG Maha Rahmokaram Month: ”देखों ईश्वर ने कैसा सुंदर नौजवान ढूंढकर हमें दिया है, सारे हिन्दुस्तान में ढूंढे भी नहीं मिलेगा’’
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By Sach Kahoon Desk
Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज एक दिन शाह मस्ताना शाह सतनाम जी धाम, डेरा सच्चा सौदा सरसा के मुख्य द्वार के सामने खड़े सेवादारों को सेवा कार्यों के बारे में समझा रहे थे। इस दौरान पूजनीय बेपरवाह जी ने सच्चे सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी […]
दर्द से कराह रहे कुत्ते के बच्चे को परम पिता जी ने एक बोरी में लपेटकर कमरे में बैठा दिया
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By Sach Kahoon Desk
MSG Maha Rahmokaram Month: एक बार सच्चे सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपने गांव, पवित्र धरती श्री जलालआणा साहिब में अपने घर की ओर आ रहे थे (गुरुगद्दी से पहले)। रास्ते में एक कुत्ते का बच्चा दर्द से कराह रहा था। उस बेजुबान जीव की पीड़ा देखकर आप जी का हृदय […]
MSG BHANDARA Month: नाम-शब्द दिए बिना ही परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने ऐसे किया जीव का उद्धार!
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By Sach Kahoon Desk
Param Pita Shah Satnam Ji: 2 फरवरी 1976, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव हठूर जिला लुधियाना में सत्संग फरमाकर गांव दीवाना की तरफ जा रहे थे। थोड़ी दूर जाने के बाद ड्राईवर रास्ता भूलकर गांव छीनीवाल वाली सड़क पर चल पड़ा। जब गांव के बाहर पहुंचे तो एक आदमी रास्ते में हाथ जोड़कर […]
Param Pita Shah Satnam Ji: पौधे पेड़ बनने से पहले ही साध-संगत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि…
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By Sach Kahoon Desk
सन् 1970 की बात है। ‘शाह मस्ताना शाह सतनाम जी धाम, डेरा सच्चा सौदा सरसा’ के मुख्य गेट के नजदीक सचखंड हॉल बन चुका था। डेरे के पंडाल में साध-संगत की सुविधा के लिए छोटे-छोटे पौधे लगाए गए थे ताकि बड़े होने पर साध-संगत इनकी छाया के नीचे बैठकर सत्संग सुन सके। एक दिन पूजनीय परम […]
Param Pita Shah Satnam Ji: ”आपके गांव का पहला नंबर है’’
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By Sach Kahoon Desk
17 जून 1967 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव केले बांदर (आजकल नसीबपुरा) जिला बठिंडा में सत्संग फरमाने के लिए पधारे। पूरा गांव सत्संग की खुशी में फूले नहीं समा रहा था। इस गांव में उस समय 317 व्यक्तियों को आप जी ने नाम की अनमोल दात प्रदान की। साध-संगत के प्रेम […]
जब पूजनीय परमपिता जी की जीप आकर पुल पर रुकी…और फिर…
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By Sach Kahoon Desk
Param Pita Shah Satnam Ji: प्रे्रमी मास्टर गुरजंट सिंह इन्सां सुपुत्र सचखण्डवासी श्री सेवा सिंह जी गाँव संगत खुर्द, जिला भटिण्डा से पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपने पर हुई अपार रहमत का वर्णन इस प्रकार करते हैं- सन् 1975 में गाँव लेलेवाला, जिला भटिण्डा में पूजनीय परमपिता जी का सत्संग था। […]
गुरु जी की आवाज में आकाशवाणी हुई, ‘बेटा, हिल-जुल कर’ और फिर बच गई जान
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By Sach Kahoon Desk
जीएसएम सेवादार भाई जरनैल सिंह इन्सां पुत्र श्री सज्जन सिंह जी, निवासी गांव शाह सतनाम जी पुरा सरसा से पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपने पर हुई अपार रहमत का वर्णन करते हैं: सन् 1975 की बात है। पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज एक बार मेरे पैतृक गांव महिमा सरजा […]
सच्चे सतगुरु जी ने शिष्य को बख्शा नया जीवन
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By Sach Kahoon Desk
गांव मलकपुरा जिला सरसा, से प्रेमी लेखराम कुल मालिक की अपार महिमा का एक वृत्तान्त इस प्रकार बयान करता है:- प्रेमी बताता है कि सन् 1964 में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज उसके गांव मलकपुरा में जब दूसरी बार सत्संग करने पधारे, तो प्रेमी ने पहले से ही निश्चित किए फै सले के […]
जब परमपिता जी ने फरमाया ‘‘लगे रहो, अपना तो काम ही यही है’’
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By Sach Kahoon Desk
सतगुरु का हर क्षण मानवता को समर्पित रहता है। एक बार राजस्थान (param pita shah satnam ji) में श्रीगंगानगर जिले के पक्का सहारणा गांव में पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज ने रूहानी सत्संग फरमाया। उस वक्त पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां बाल रूप में थे तो सेवादारों ने पूजनीय […]