गुरुमंत्र के अभ्यास से साफ होगा अंतकरण

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Anmol Vachan

सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि प्रभु किसी दिखावे में नहीं आता। उसे अगर पाना है, तो अपने अंत:करण को साफ करना होता है और जब तक आप भक्ति नहीं करेंगे, आपके दिलो-दिमाग का शीशा साफ नहीं होगा। आप कोई भी डिग्री-डिप्लोमा करते हैं, तो अपनी जिंदगी के 20-25 साल लगाते हैं, और अगर आपने मालिक को देखना है, उसकी भक्ति को जानना है, तो जिंदगी के 20-25 महीने ही भगवान की तरफ लगाकर देखो। तभी आप बता सकते हैं कि भगवान है या नहीं है। चंद किताबें पढ़ लेने से, थोड़ी डिग्री-डिप्लोमा हासिल कर लेने से आप यह कहें कि भगवान नहीं है, तो इसे मूर्खता नहीं कहेंगे, तो क्या कहेंगे? इसलिए पहले आप गुरुमंत्र लो, फिर उसका अभ्यास करो। जिस तरह टीचर कहता है कि बेटा, ऐसा पढ़ो।

आप उसे फॉलो करते हैं, तो आप मेरिट होल्डर बन जाते हैं। कई पास भी हो जाते हैं। उसी तरह आपको गुरुमंत्र लेना होगा, फिर घंटा-घंटा सुबह-शाम उसका अभ्यास करना होगा और महीने में पांच-चार दिन परहित, परमार्थ करो। भूखे को खाना खिलाओ, प्यासे को पानी पिलाओ, बीमार का ईलाज करवाओ, किसी गरीब को विद्यादान दो, खूनदान करो, मरणोपरांत आंखें व शरीर दान करो, यह सच्चा दान है। या जैसे साध-संगत ने फूड बैंक, टॉय बैंक, क्लॉथ बैंक खोले हैं, आप सब उसमें सेवा कीजिए। यकीन मानिए, आप मालिक की औलाद की सेवा करते हैं, तो इनडायरेक्टली वो मालिक की सेवा है और बदले में वो खुशियां जरूर बख्श देते हैं।

 

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