शिक्षा और रोजगार
High Court News: हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी पर लगाई रोक
हरियाणा सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई
चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। Chandigarh News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में निजी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी पर लगाने के आदेश पर रोक लगा दी है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट के जस्टिस एचएस बराड़ ने एक और सात सितंबर 2026 को जारी सरकारी पत्रों के आधार पर की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाई है।
हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने याचिका में कहा है कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4ए के तहत स्थानीय प्राधिकरणों के अधिकारियों और कर्मचारियों को जनगणना के काम के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान है। निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक और कर्मचारी इस श्रेणी में नहीं आते। संगठन का तर्क है कि केवल प्रशासनिक आदेश जारी करके निजी स्कूलों के कर्मचारियों को स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारियों के समान नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर संगठन ने निजी स्कूलों के शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी लगाने के आदेशों को कानून के खिलाफ बताया है।
सूची मांगने के बाद शुरू हुआ विवाद
याचिका के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने तीन मार्च 2026 को निजी स्कूलों को पत्र भेजकर जनगणना-2027 के लिए शिक्षकों की सूची मांगी थी। संगठन ने 17 मार्च को इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों को अनिवार्य रूप से जनगणना ड्यूटी पर लगाना कानून के अनुरूप नहीं है। हालांकि, संबंधित अधिकारी ने 18 मार्च को इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। इसके बाद संगठन ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
पढ़ाई प्रभावित होने की जताई आशंका
संगठन ने अदालत में दलील दी कि निजी स्कूलों के बड़ी संख्या में शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाने से स्कूलों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होगी। याचिका में बताया गया है कि संगठन से जुड़े स्कूलों में करीब 16 हजार शिक्षक कार्यरत हैं और इनमें बड़ी संख्या महिला शिक्षकों की है। संगठन के अनुसार, शिक्षकों पर स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती हैं। ऐसे में उन्हें जनगणना ड्यूटी पर लगाने से स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
सितंबर के दोनों पत्र रद्द करने की मांग
कॉन्फ्रेंस ने हाईकोर्ट से एक और सात सितंबर 2026 को जारी पत्रों को अधिकार क्षेत्र से बाहर और कानून के विपरीत घोषित कर रद्द करने की मांग की है। साथ ही, इन पत्रों के आधार पर की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाने और भविष्य में निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर लगाने से पहले अदालत की अनुमति लेने के निर्देश देने का आग्रह किया है। हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकारी आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।