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पंजाब सरकार ने लिया 1,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज
पहले ही पंजाब पर करीब 5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ
चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Punjab News: पंजाब सरकार ने एक बार फिर से नया कर्ज लिया है। इस बार सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने के लिए सरकारी बॉन्ड को बाजार में बेचने के लिए रखा है। नए कर्ज की घोषणा के साथ ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने सरकार की वित्तीय नीति और कर्ज प्रबंधन को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं।
भाजपा पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार लगातार कर्ज लेकर पंजाब को गंभीर वित्तीय संकट की ओर धकेल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘रंगला पंजाब’ के दावे को ‘कंगाल पंजाब’ में बदल दिया है। ढिल्लों ने कहा कि पंजाब के वित्त विभाग द्वारा 10 जुलाई 2026 को 7.55 प्रतिशत पंजाब एसजीएस-2033 के पुन: निर्गम के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने संबंधी जारी अधिसूचना, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा किए जा रहे राजस्व वृद्धि के दावों से मेल नहीं खाती। उनका कहना था कि यदि सरकार का राजस्व लगातार बढ़ रहा है, तो बार-बार बाजार से कर्ज लेने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 2022-23 में सरकार ने लगभग 24 हजार करोड़ रुपये, 2023-24 में करीब 28 हजार करोड़ रुपये तथा 2024-25 में 34,201 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान जनवरी तक सरकार 20,770 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज ले चुकी थी और पूरे वित्तीय वर्ष में लगभग 49,900 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना बनाई गई थी। अब इसमें 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज भी शामिल हो गया है।
सीएम मान व वित्त मंत्री पंजाब की वास्तविक वित्तीय स्थिति जनता के सामने करें स्पष्ट: केवल सिंह ढ़िल्लों
केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि वर्ष 2022 में पंजाब पर कुल बकाया कर्ज लगभग 2.82 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 4.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो वर्ष 2026-27 तक राज्य का कुल कर्ज लगभग 4.48 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से मांग की कि वे पंजाब की वास्तविक वित्तीय स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करें तथा लगातार कर्ज लेने के बजाय कर्ज का बोझ कम करने के लिए ठोस और विश्वसनीय रोडमैप प्रस्तुत करें। दूसरी ओर, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने भी पंजाब सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर सरकार की वित्तीय नीति पर सवाल उठाए हैं।