Inspiring Personality: 5 अगस्त का ऐतिहासिक दिन, जब न्यायमूर्ति लीला सेठ बनीं भारत की पहली महिला हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश

भारत की पहली महिला हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश की प्रेरक कहानी

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Women's Leadership: नई दिल्ली। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में 5 अगस्त एक विशेष महत्व रखता है। इसी दिन वर्ष 1991 में न्यायमूर्ति लीला सेठ ने देश की पहली महिला हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश बनकर एक नया अध्याय लिखा। उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। यह उपलब्धि न केवल भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक थी, बल्कि महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का भी सशक्त प्रतीक बनी। Inspiring Personality

न्यायमूर्ति लीला सेठ का जन्म 20 अक्टूबर 1930 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ था। विवाह के बाद वे अपने पति के साथ लंदन चली गईं, जहां उन्होंने विधि की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1958 में उन्होंने लंदन बार परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। इस परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली वे पहली महिला थीं, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान दिलाई।

भारत लौटने के बाद उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में अपने कानूनी जीवन की शुरुआत की। वर्षों तक सफल वकालत करने के बाद वर्ष 1978 में उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इस पद पर पहुंचने वाली भी वे पहली महिला थीं। बाद में उनके अनुभव, निष्पक्षता और विधिक ज्ञान को देखते हुए उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।

अपने न्यायिक जीवन के दौरान लीला सेठ ने महिला अधिकारों, बाल संरक्षण, लैंगिक समानता और न्यायिक सुधार जैसे विषयों पर उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने कानूनों में सुधार और सामाजिक न्याय को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण समितियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

न्यायमूर्ति लीला सेठ का जीवन संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट कार्यशैली के बल पर महिलाएं न्यायपालिका सहित हर क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सकती हैं। आज भी उनका योगदान भारतीय न्याय व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। Inspiring Personality

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