Care: अपनों ने छोड़ा साथ, इन सेवादारों ने निभाया रिश्ता
डेरा श्रद्धालुओं का प्यार मिला तो आनंद वाटिका वृद्ध आश्रम के बुजुर्गों के खिल उठे चेहरे
करनाल, (सच कहूँ/विजय शर्मा)। मानवता और सेवा की मिसाल पेश करते हुए जिला करनाल की शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी/ एमएसजी आईटी विंग के सेवादारों ने कैथल रोड स्थित आनंद वाटिका वृद्ध आश्रम में पहुंचकर बुजुर्गों की सार-संभाल की और उनके साथ समय बिताया। सेवादारों ने डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए बुजुर्गों को अपने हाथों से मिठाइयां व खाने-पीने का सामान खिलाया तथा उनका आशीर्वाद लिया। सेवादारों के प्रेम, अपनत्व और सेवा-भाव से बुजुर्ग भावुक हो उठे।
उन्होंने कहा कि जिन्हें हमने अपने हाथों से पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्हीं अपनों ने आज हमें अकेला छोड़ दिया, लेकिन जिनसे हमारा कोई खून का रिश्ता नहीं है, वही आज हमें अपने माता-पिता की तरह प्यार और सम्मान दे रहे हैं। बुजुर्गों ने सेवादारों के इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए पूज्य गुरु जी का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी पावन शिक्षाओं से प्रेरित होकर समाज में मानवता और सेवा की भावना को बढ़ावा मिल रहा है तथा जरूरतमंदों और बुजुर्गों को अपनापन मिल रहा है।
वहीं सेवादारों की इस पहल से आश्रम के बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। यह सेवा कार्य समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और सेवा की भावना से भी बनते हैं। इस सेवाकार्य में दीपक इन्सां, मिंटू इन्सां, रामपाल इन्सां, जसबीर इन्सांं, प्रदीप इन्सां ,मेहर सिंह इन्सां, शिशपाल इन्सां, सोमवीर, अनिल, धर्मवीर इन्सां, अशोक इन्सां सतीश, आर्यन, रमेश इन्सां सहित अन्य सेवादारों ने हिस्सा लिया।
सेवा से मिला अपनापन, बुजुर्गों की आंखों से छलके आंसू

इस दौरान वृद्ध आश्रम की सेवादार बहन ने सेवादारों और डेरा सच्चा सौदा द्वारा किए जा रहे इस मानवता भलाई कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब कई बुजुर्ग अपनों के साथ से वंचित हो जाते हैं, ऐसे दौर में करनाल के सेवादारों ने आश्रम पहुंचकर समय, सेवा और प्यार बांटकर यह साबित कर दिया कि ये बुजुर्ग अकेले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को केवल जरूरत की चीजें देना ही सेवा नहीं है, बल्कि उनके साथ बैठना, उनसे बातचीत करना, उन्हें सम्मान देना और अपनेपन का एहसास कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
