Farmer Success Story: मत्तड़ के किसान गुरप्रीत का 62 सब्जियों का अनोखा मॉडल, किसान हुआ मालामाल
62 किस्मों वाली सब्जी की खेती, 10-12 लाख सालाना शुद्ध आमदनी
Sirsa Farmer Success Story: सरसा, (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। जब खेत में एक ही फसल के बजाय बाजार की मांग के अनुसार 62 किस्म की सब्जियां उगने लगें तो खेती का तरीका ही नहीं, कमाई का गणित भी बदल जाता है। जिले के गांव मत्तड़ के किसान गुरप्रीत सिंह पुत्र गुरबचन सिंह ने धान-गेहूँ के पारंपरिक फसल चक्र से हटकर पांच एकड़ में विविध सब्जी खेती का मॉडल तैयार किया है। खेत के अलग-अलग हिस्सों में 15 से 20 दिन के अंतराल पर बुवाई होने से सालभर उत्पादन का सिलसिला बना रहता है। लीक, सेलेरी, चेरी टमाटर, रंगीन गोभी, घेरकिन खीरा और रंगीन शिमला मिर्च जैसी विशेष किस्मों की सब्जियां अब चंडीगढ़, दिल्ली और लुधियाना के बाजारों तक पहुंच रही हैं। किसान का दावा है कि इस बदलाव से पांच एकड़ जमीन से सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक शुद्ध आमदनी हो रही है।
विशेष सब्जियों के लिए अलग बाजार
गुरप्रीत सिंह के अनुसार विदेशी और विशेष किस्म की सब्जियों का बाजार सामान्य सब्जियों से अलग है। चेरी टमाटर की होटल और कंपनियों में मांग रहती है, जबकि रंगीन गोभी और घेरकिन खीरे के भी विशेष खरीददार हैं। उनका कहना है कि ऐसी खेती शुरू करने से पहले बाजार और खरीदार की जानकारी जुटाना बेहद जरूरी है। पहले यह तय होना चाहिए कि उपज कहां और किसे बेचनी है, इसके बाद ही फसल का चयन करना चाहिए।
पांच एकड़ से 10-12 लाख रुपये शुद्ध आमदनी का दावा
गुरप्रीत सिंह के अनुसार, पहले पांच एकड़ में धान-गेहूँ की खेती से सालभर में करीब 2 से 2.5 लाख रुपये की बचत होती थी। विविध सब्जी उत्पादन शुरू करने के बाद उनका दावा है कि सभी खर्च निकालने के पश्चात अब 10 से 12 लाख रुपये सालाना शुद्ध मुनाफा हो रहा है। किसान के मुताबिक, इस खेती से पानी की खपत भी परंपरागत खेती की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक कम हुई है।
पहले बाजार तलाशें, फिर बीज खरीदें
गुरप्रीत सिंह का कहना है कि नई तरह की खेती अपनाने वाले किसानों को शुरूआत में बड़े स्तर पर जोखिम लेने के बजाय एक कनाल या छोटे क्षेत्र में प्रयोग करना चाहिए। पहले बाजार में सब्जी की मांग, संभावित खरीददार और बेहतर भाव मिलने के समय की जानकारी लेनी चाहिए। इसके बाद ही बीज और फसल का चयन करना चाहिए। उनके अनुसार कंपनियों, होटलों और सीधे खरीददारों से संपर्क होने पर किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है। मत्तड़ के किसान का यह प्रयोग फसल विविधीकरण, बाजार की समझ और चरणबद्ध उत्पादन के जरिए छोटी जोत को सालभर आय देने वाले मॉडल में बदलने की संभावनाएं दिखाता है।