ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, एसडीएम ने लिया नुकसान का जायजा
एसडीएम ने विशेष गिरदावरी करवाने का दिया भरोसा, जल्द खुलेगा क्षतिपूर्ति पोर्टल
रानियां (सच कहूँ/राजेंद्र गाबा/सुनील कुमार)। कड़ी मेहनत और हजारों रुपये खर्च कर पकाई धान की फसल पर ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। रानियां क्षेत्र के कई गांवों में 24 अक्तूबर को हुई ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी धान की फसल को 70 से 80 प्रतिशत तक नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। बुधवार को ऐलनाबाद की एसडीएम अदिति सिंघानिया ने प्रभावित गांवों के खेतों में पहुंचकर फसल खराबे का जायजा लिया। किसानों ने उनके सामने नुकसान की स्थिति रखते हुए सरकार से उचित मुआवजे की मांग की। एसडीएम ने गांव नानुआना, सुल्तानपुरिया और रानियां क्षेत्र के खेतों का निरीक्षण किया।
इस दौरान किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से पककर तैयार धान की बालियां झड़कर जमीन पर गिर गईं। सुल्तानपुरिया, नानुआना, ओटू, रानियां, फतेहपुरिया, मोहम्मदपुरिया, लहरांवाली ढाणी और रामपुर थेड़ी में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने बताया कि बिजाई के समय बारिश की कमी के कारण धान की फसल में पानी की जरूरत भूमिगत जल से पूरी करनी पड़ी। सिंचाई, खाद और अन्य संसाधनों पर काफी खर्च करने के बाद फसल तैयार हुई थी, लेकिन कटाई से पहले हुई ओलावृष्टि ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। निरीक्षण के दौरान नायब तहसीलदार लोकेश शर्मा, कृषि विभाग सरसा के एसडीओ डॉ. जितेंद्र अहलावत, खंड कृषि अधिकारी गुरदीप सिंह, हल्का पटवारी और अन्य विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।
विशेष गिरदावरी के लिए तकनीकी टीम करेगी निरीक्षण
एसडीएम अदिति सिंघानिया ने किसानों को आश्वासन दिया कि फसल खराबे की जानकारी सरकार और उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। प्रभावित गांवों में कृषि विभाग की तकनीकी टीम जल्द निरीक्षण कर नुकसान का आंकलन करेगी। उन्होंने विशेष गिरदावरी करवाने के लिए भी प्रयास करने की बात कही, ताकि नियमानुसार किसानों को राहत मिल सके। एसडीएम ने बताया कि जिन किसानों ने फसल बीमा करवाया हुआ है, वे बीमा कंपनी से नियमानुसार क्लेम प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, जिन किसानों की फसल का बीमा नहीं है, उनके लिए सरकार की ओर से जल्द क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाएगा। प्रभावित किसान अपनी फसल के नुकसान का विवरण पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करवाएं, ताकि विभाग की ओर से उसका सत्यापन किया जा सके।
Comments