Sirsa News: छोटे भाई का जीवन बचाने को रोड़ी की इस बहन ने दे दी अपनी किडनी

पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से हुआ संभव: बलविन्द्र कौर इन्सां

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ओढ़ां, राजू। भाई-बहन का रिश्ता समाज में आपसी स्नेह का एक बड़ा प्रतीक होता है। ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जहां बहनों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अपने भाईयों की जान बचाई। इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण सरसा जिला के ब्लॉक रोड़ी में उस वक्त देखा गया जब एक बहन अपने छोटे भाई के लिए जीवनरक्षक बन गई। देखने-सुनने वाले के मुंह से बस यही निकला कि बहन हो तो ऐसी। इस बहन की बदौलत आज भाई के घर में फिर से खुशी लौट आई है। Sirsa News

भाई ने अपनी बहन का नारा लगाकर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य गुरु जी से प्रार्थना है कि मुझे हर जन्म में वह ही बड़ी बहन के रूप में मिले। शुक्रवार को ब्लॉक रोड़ी की साध-संगत की ओर से इस बहन को पूज्य गुरु जी का पावन स्वरूप देकर सम्मानित किया गया। दरअसल रतिया निवासी करीब 43 वर्षीय कुलदीप सिंह इन्सां पिछले करीब 3-4 माह से अस्वस्थ चल रहा था। चिकित्सकों ने उसे कहा कि अगर उसे जीवित रहना है तो किडनी का प्रबंध करना पड़ेगा।

ये सुनकर कुलदीप सिंह का पूरा परिवार दु:खी हो गया। उन्हें कुछ भी नहीं सूझ रहा था कि इस स्थिति में क्या करें। ऐसे में कुलदीप सिंह की बड़ी बहन ब्लॉक रोड़ी के गांव नागोकी निवासी करीब 44 वर्षीय बलविन्द्र कौर इन्सां कुलदीप के लिए उम्मीद की किरण बनी। बलविन्द्र कौर ने बड़ी बहन का फर्ज निभाते हुए कहा कि वह अपनी स्वयं की एक किडनी देकर अपने भाई का जीवन बचाएगी। बलविन्द्र कौर इन्सां ने सभी विभागीय औपचारिक्ताएं पूर्ण कर अपने भाई को किडनी दान देकर न केवल उसके बल्कि पूरे परिवार के चेहरे पर खुशी लौटा दी।

पूज्य गुरु जी के पावन आशीर्वाद से ही हुआ संभव

बलविन्द्र कौर इन्सां ने कहा कि ये सब पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन आशीर्वाद एवं प्रेरणा से ही संभव हुआ है। बलविन्द्र कौर ने कहा कि इस ट्रांसप्लांट से पूर्व उसे काफी लोगों ने कहा भी था कि किडनी देने के बाद उसे कुछ हो जाता है तो उसके बच्चे कौन पालेगा। लेकिन बलविन्द्र कौर ने किसी की न सुनते हुए अपने सतगुरु पर पूर्ण विश्वास रखा और हंसते-हंसते अपने भाई को अपनी एक किडनी दे दी। Sirsa News

बलविन्द्र कौर ने बताया कि उसने पूज्य गुरु जी की प्रेरणाओं पर चलते हुए जीते-जी किडनी दान एवं मरणोपरांत नेत्रदान करने प्रतिज्ञा पत्र भरा हुआ है। जब प्रण ही कर लिया तो फिर हिचकिचाना किस बात का। कुलदीप मुझसे छोटा है ऐसे में बड़े होने के नाते मेरा भी कुछ फर्ज बनता था।

ये उपकार हमेशा याद रहेगा: कुलदीप इन्सां

किडनी प्रत्यारोपण के बाद दोनों बहन-भाई बिल्कुल स्वस्थ हैं। कुलदीप सिंह इन्सां ने नंम आँखों से नारा लगाकर आभार जताते हुए कहा कि माँ कुलवंत कौर इन्सां के बाद ये जीवन उसकी बहन बलविन्द्र कौर इन्सां व रतिया निवासी प्रेमी अशोक इन्सां का ऋणी हो गया। ये 2 इंसान उसके जीवन में फरिश्ता बनकर आए। उनका का ये उपकार उसके परिवार पर हमेशा रहेगा। बहन की बदौलत ही आज वह अपने परिवार के बीच है और सकुशल है।

कुलदीप इन्सां का 15 वर्ष पूर्व भी किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। उस समय रतिया के रहने वाले प्रेमी अशोक कुमार इन्सां ने अपनी एक किडनी कुलदीप इन्सां को दान की थी। हालांकि उस समय भी बलविन्द्र कौर इन्सां किडनी देने को तैयार थी। लेकिन कुछ स्वास्थ्य कारणों के चलते ये संभव नहीं हो पाया था।

नर्सिंग ऑफिसर है बलविन्द्र कौर इन्सां

बलविन्द्र कौर इन्सां गांव बडागुढ़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में नर्सिंग ऑफिसर है। उसके पति सुलखन सिंह इन्सां की वर्ष 2018 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उसके एक बेटा व एक बेटी है। जिनमें बेटी दमनजोत इन्सां कनाडा में पढ़ाई कर रही है जबकि छोटा बेटा स्टीवन इन्सां अभी स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। अपने भाई को किडनी देकर बलविन्द्र कौर फिर से अपनी ड्यूटी पर लौट चुकी है। बलविन्द्र कौर का कहना है कि उसकी बस यही कामना है कि उसके बच्चे भी अपने पैरों पर खड़े होकर पूज्य गुरु जी की प्रेरणाओं पर चलते हुए सेवा, सुमिरन व सफलता की ओर बढ़ें। Sirsa News

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