ट्योढ़ी के जूट के कट्टे से दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों तक पहुंचे डॉ. राम करन

साइरैंक ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स-2025 में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों में मिला स्थान

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बागपत/बड़ौत ((सच कहूँ/डॉ संदीप दहिया)। Baraut News: ट्योढ़ी गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में जूट का कट्टा बिछाकर पढ़ाई शुरू करने वाले डॉ. राम करन ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में बड़ी पहचान बनाई है। दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राम करन को साइरैंक ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स-2025 में दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान मिला है। उनकी इस उपलब्धि से बागपत जिले का नाम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है।

डॉ. राम करन की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनका शुरुआती जीवन और शिक्षा बेहद सामान्य ग्रामीण परिवेश में हुई। ट्योढ़ी के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में उस समय बच्चे घर से जूट का कट्टा लेकर आते थे और उसे जमीन पर बिछाकर पढ़ते थे। इसी विद्यालय से शिक्षा की नींव रखने के बाद उन्होंने सरूरपुर इंटर कॉलेज से कक्षा छह से 12 तक पढ़ाई की। इसके बाद जाट कॉलेज, बड़ौत से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की और उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने पीएचडी पूरी की।

नासा के शोध से लेकर जापान के युवा वैज्ञानिक पुरस्कार तक

पीएचडी के बाद डॉ. राम करन का शोध सफर भारत से निकलकर अमेरिका, इटली, रोमानिया, ग्रीस, स्पेन, जापान और सऊदी अरब सहित कई देशों तक पहुंचा। करीब 13 वर्ष विदेश में शोध कार्य करने के बाद वे भारत लौटे और अब दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान में सक्रिय हैं। वर्ष 2005 और 2007 में उन्हें आईआईटी दिल्ली में पीएचडी के लिए भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय से अनुसंधान फैलोशिप मिली। वर्ष 2010 में चीन में शोध प्रस्तुत करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से अनुदान मिला। बीजिंग में शोध कार्य के लिए उन्हें पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। वर्ष 2011 में आईआईटी दिल्ली ने उनके शोध प्रकाशन को सम्मानित किया।

इसके बाद अमेरिका में शोध के लिए एएसएम अवसर, वर्ष 2012 में नासा से मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना से जुड़े शोध के लिए अनुदान, वर्ष 2013 में अमेरिका के नेशनल साइंस फाउंडेशन से अनुसंधान अनुदान और वर्ष 2014 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से फैलोशिप मिली। वर्ष 2017 में सऊदी अरब में लाल सागर की गहराई में पाए जाने वाले विशेष एंजाइमों पर शोध के लिए सम्मान, वर्ष 2018 में इटली में शोध एवं अनुसंधान में रचनात्मकता सम्मान और वर्ष 2019 में जापान में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिला।

75 से अधिक शोध पत्र, तीन पेटेंट

करीब दो दशक से वैज्ञानिक शोध से जुड़े डॉ. राम करन के 75 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनके नाम तीन पेटेंट भी हैं। पर्यावरण, प्रदूषण और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन की संभावनाओं को समझना उनके शोध कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उनके वैज्ञानिक सफर में नासा से जुड़े कार्य और मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना से संबंधित शोध भी उल्लेखनीय रहे हैं।

अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. राम करन ने कहा कि दुनिया में उनसे बहुत आगे और बड़े वैज्ञानिक हैं, इसलिए वे इस उपलब्धि को किसी से तुलना के रूप में नहीं देखते। उन्होंने कहा कि ट्योढ़ी के उस सरकारी स्कूल से दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची तक पहुंचना मेरे लिए बेहद भावुक पल है। यह मंजिल नहीं, सफर का एक खूबसूरत पड़ाव है।उनकी यात्रा ने उन्हें यही सिखाया है कि व्यक्ति कहां से शुरुआत करता है, यह तय नहीं करता कि वह कहां तक जा सकता है।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों, गुरुओं, परिवार, सहयोगियों और विद्यार्थियों को देते हुए कहा कि सभी का इस सफर में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

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