टोका-मशीन तो ‘जिम का भी बाप’

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खिलाड़ी के लिए खेलना क तपस्या है। खेलों में भाग लेने से जहां मानसिक व शारीरिक विकास सम्भव होता है, वहीं यह एक मनोरंजन का भी साधन है। हर उम्र के लोग खेलों में भाग ले सकते हैं। खेलों में भाग लेने से चुस्ती आती है। खेल हमें अनुशासन में रहना सिखाते हैं। इसके लिए तन्मयता से प्रैक्टिस के साथ-साथ तकनीक व अच्छे आहार की भी आवश्यकता है।

मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए

डम्बल लें या चारपाई उठा लें और उसे ऊपर-नीचे करें। जिम है तो ठीक है, नहीं तो बॉडी वेट ही डम्बल है, दंड बैठक, पुशअप करें, जिम की जरूरत ही नहीं रहेगी। यह धीरे-धीरे करना चाहिए, ताकि शरीर के किसी भी भाग में झटका लगने का डर नहीं रहे। हर खेल में स्पीड होना जरूरी है और स्पीड बढ़ाने के लिए ज़िग-ज़ैग दौड़ लगानी चाहिए।

एक्सरसाइज़

एक्सरसाइज़ इस तरह से करनी चाहिए कि बॉडी सिर से लेकर पैर तक पसीने से नहा ले, यह शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है। सीढ़ियाँ भाग-भाग के चढ़ो। साँस धौंकनी की तरह चलना चाहिए। आपको फील होना चाहिए कि आपका हार्ट बोल रहा है। ऐसा करने से आपको दिल की कोई बीमारी नहीं लगेगी व बहुत-सी अन्य बीमारियाँ भी खुद ही उड़ जाएंगी। ऐसा अगर आप लगातार करने लग गए तो बीमारियाँ तो दूर जाएंगी ही, आपका वजन भी कम होगा।

माता-पिता को चाहिए कि अपने बच्चों को बचपन से ही एक्सरसाइज़ करवाएँ। ऐसा करने से बच्चे की ग्रोथ कम नहीं, बल्कि ज्यादा होगी। बच्चा स्ट्रांग बनेगा तो स्ट्रांग ही सोचेगा। ज्यादा वेट-लिफ्टिंग से परहेज करो। पर बच्चे के अंग-पैरों को मोड़ना, हल्के-फुल्के योगा के आसान करवाने से बच्चे की बॉडी की बनावट में कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि चलते-चलते उसकी कोई नाड़ी नहीं चढ़ेगी या आगे पीछे होने से उसके कोई दर्द नहीं होगा। चाहे बच्चा कैसे भी गिरता है, कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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