जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही से गरीब परिवारों के दो बच्चों की मौत, लोगों में आक्रोश

इंदिरा वाटिका के नौका विहार से नहीं निकलवाया बरसाती पानी, खेलते हुए दो बच्चे डूब गए

श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले दो परिवारों पर आज दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उनके दो बच्चे जवाहरनगर में मीरा मार्ग पर स्थित इंदिरा वाटिका में बरसाती पानी से लबालब भरे बाल नौका विहार में डूबने से मौत हो गई। इन बच्चों के साथ दो बच्चे और भी थे, जो वहां से भाग गए। हादसे से शहर के लोगों में प्रशासन विशेषकर नगर परिषद तथा नगर विकास न्यास के अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश फैल गया। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस के अधिकारियों को रोष का सामना करना पड़ा जबकि जिला प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी घटना के तीन घंटे बाद तक मौके पर नहीं पहुंचा।

मृतक बच्चों की पहचान नगर विकास न्यास के कार्यालय के समीप ही झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले देव (11) पुत्र दिलीप तथा सन्नी (8) पुत्र हेतराम के रूप में हुई है। इन बच्चों को मृत अवस्था में जिला अस्पताल के मुर्दाघर में लाए जाने का पता चला,इनके परिवारजन तथा झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले अन्य गरीब परिवारों के लोग भागकर सामने ही जिला अस्पताल पहुंचे। इन लोगों में भारी कोहराम मच गया। दोनों मृतक बच्चों के परिवारजनों की हालत देखी नहीं जा रही थी। उनका रो-रो कर बुरा हाल हो गया। इंदिरा वाटिका में इकट्ठा हुए लोगों ने इस घटना को लेकर भारी आक्रोश जताया।इसके लिए जिला प्रशासन, नगर परिषद तथा नगर विकास न्यास के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। मौके पर पहुंचे नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष संजय महिपाल,कांग्रेस नेता रूपराम सहारण, समाजसेवी संजय मूंदड़ा,वार्ड पार्षद प्रियंक भाटी तथा सीताराम शेरेवाला सहित अनेक लोगों ने आक्रोश तथा दुख जताते हुए कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

लोगों ने यह भी कहा कि प्रशासन इस हादसे की जांच करवाए और दोषी अधिकारी की जिम्मेवारी ठहराया ना कि किसी निचले स्तर के कर्मचारी को दोषी बताकर लीपापोती कर दी जाए। यह हादसा प्रात: 10:15 बजे हुआ इंदिरा वाटिका के मुख्य द्वार के सामने नौका विहार के गेट के पास है। चार-पांच बच्चे खड़े थे। नौका विहार के दोनों गेट खुले हुए थे। इनमें से दो बच्चे गेट खोल कर सीढ़ियों से नीचे उतर गए। उन्होंने कपड़े उतार कर सीढ़ियों पर रख दिए और नहाने के लिए पानी में चले गए ।दो बच्चे सीढ़ियों पर ही खड़े रहे। उन्होंने जब पानी में उतरे बच्चों को हाथ पांव मारते तथा डूबते देखा तो उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। इंदिरा वाटिका के मुख्य द्वार के नजदीक एक जिम के संचालक हैरी ने बताया कि वह उस समय पार्क में ही था। शोर सुनकर वह और 2-4 अन्य लोग भाग कर आए। इस बीच बाहर खड़े दोनों बच्चे अपने घर वालों को बताने का कहते हुए भाग गए।

275 एमएम बारिश

उन्होंने देखा कि सीढ़ियों के पास ही दो बच्चों के हाथ पानी से बाहर निकले हुए हैं। उन्होंने दोनों बच्चों को बाहर निकाला। बच्चों को उल्टा लिटा कर उनके पेट के पानी को निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक मौत हो चुकी थी। पार्क में घूम रहे और भी लोग इकट्ठे हो गए। हादसे की सूचना दिए जाने पर आपातकाल सेवा 108 की एंबुलेंस कुछ ही देर में पहुंच गई। दोनों बच्चों के शवों को जिला अस्पताल भिजवाया गया। इस हादसे की जानकारी मिलते ही नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष संजय महिपाल तत्काल ही घटनास्थल पर आ गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रूपराम सहारण भी पहुंचे। श्री सहारन ने बताया कि वह 10 बजे तक खुद पार्क में टहल रहे थे। तब उन्होंने इन बच्चों को नौका विहार के इन गेटों के पास खेलते हुए देखा था। उन्होंने बच्चों को वहां से दूर रहने के लिए भी कहा, क्योंकि सीढ़ियों के दोनों गेट खुले हुए थे। तब यह बच्चे वहां से हट भी गए। उनके पार्क से जाने के 15 मिनट बाद ही यह हादसा होने की सूचना मिली।

मौके पर पहुंचे समाजसेवी संजय मूंदड़ा, वार्ड पार्षद प्रियंक भाटी तथा समाजसेवी सीताराम शेरेवाला आदि ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस लापरवाही के लिए अधिकारी ही जिम्मेवार हैं। हमेशा खाली रहने वाला यह नौका विहार 15 दिन पहले एक ही दिन में हुई रिकॉर्ड तोड़ 275 एमएम बारिश में लबालब भर गया था। पार्क में सुबह शाम हजारों लोग आते हैं।प्रशासन के अधिकारियों ने इस पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं किया। यही नहीं इसके आमने सामने सीढ़ियों से लगे दोनों गेटों पर ताला भी नहीं लगाया गया। लबालब पानी भरा होने के बावजूद चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाए गए। अधिकारियों की यही लापरवाही आज झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले दलीप तथा हेतराम के परिवारों पर भारी पड़ गई।

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