सरसा के कई गाँवों में बाढ़ का खतरा फिर मदद के लिए आगे आए शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग

  • रूपाणा, माणक दिवान और दड़बा गाँव में प्रशासन के साथ संभाला मोर्चा

  • सेम नाले से घास निकाली और कमजोर किनारों को किया मजबूत

  • ग्रामीण बोले-भगवान के दूत हैं डेरा सच्चा सौदा के सेवादार

नाथूसरी चौपटा/सरसा। भारी बारिश के चलते और सेम नाले में जलस्तर बढ़ने के कारण सरसा जिले के कई गाँवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन ने डेरा सच्चा सौदा से सहयोग की अपील की। इसके पश्चात सोमवार दोपहर बाद डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन समिति के दिशा-निर्देशानुसार शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सैकड़ों सेवादारों ने रूपाणा, माणक दिवान और दड़बा गाँव में प्रशासन के साथ मोर्चा संभाल लिया। मुसीबत में घिरे लोगों की मदद के लिए फरिश्ता बन पहुंचे इन सेवादारों ने सबसे पहले सेम नाले के अंदर से घास-फूंस, केली आदि साफ की, ताकि पानी का प्रवाह सही रहे।

वहीं मानव श्रृंखला बनाकर मिट्टी के गट्टों की मदद से सेम नाले के कमजोर किनारों को बांधना शुरू किया। सेवादारों ने बताया कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षा है कि मुश्किल के वक्त में जरूरतमंदों की मदद करना ही सच्ची इन्सानियत है। इसी के मद्देनजर हम यहां ग्रामीणों को बाढ़ की भयावहता से बचाने के लिए इस सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि हमें दोपहर तीन बजे डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन की तरफ से सूचना मिली थी, इसके बाद सैकड़ों सेवादार यहां पहुंचे और पूरी तन्मयता से सेवा कर रहे हैं। सेवादारों ने बताया कि ग्रामीणों की हर संभव सहायता के लिए यह अभियान दिन-रात जारी रहेगा। वहीं माणक दिवान के ग्रामीण अग्निवेश, बलदेव, पवन, राममूर्ति आदि लोगों ने डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं को भगवान के दूत बताया, जो हर मुसीबत में मदद को आगे रहते हैं।

छाया: सुशील कुमार
छाया: सुशील कुमार

छाया: सुशील कुमार
  • 35000 एकड़ जमीन में खड़ी फसलें जलमग्न

बता दें कि 3 दिनों से लगातार बारिश होने से सेम नाला के आसपास के करीब 20 गाँवों में ग्रामीणों को काफी नुकसान हुआ है। बारिश से करीब 35000 एकड़ जमीन में खड़ी सावनी की फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई और गाँवों की गलियों में पानी भरने से लोगों के घरों में पानी घुस गया। गनीमत यह रही कि सोमवार को बारिश नहीं हुई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश की वजह से पानी भरने से जहां फसलें खराब हुई है। वहीं लोगों के मकान भी गिरने शुरू हो गए हैं। ऐसे में घर के सभी बड़े, बच्चे, बूढ़े व महिलाएं फसल बचाने और मकानों को बचाने में ही लगे रहे। सोमवार को सरसा-भादरा रोड पर नाथूसरी चौपटा और दड़बा कला के बीच चौधरी देवीलाल पॉलिटेक्निकल के पास सेम नाला टूटने से अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। सरसा-भादरा रोड को बंद कर दिया गया। जिससे आवागमन करने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सेम नाला के आसपास के 20 गाँवों को नुकसान

करीब 30 किलोमीटर लंबे सेम नाले के आसपास लगते नाथूसरी कलां, शाहपुरिया, शक्कर मंदोरी, नहराना, तरका वाली, माखोसरानी, कैंरावाली लुदेसर, रुपाणा, ढुकड़ा, बकरियां वाली, गुड़िया खेड़ा, रुपावास, रायपुर, निर्बाण, मानक दीवान सहित कई गांवों में फसलें जलमग्न हो गई हैं। इन गांवों की गलियों में भी पानी भर गया है जिससे घरों में पानी भरने से मकान गिरने शुरू हो गए हैं खेतों में बनी ढाणियों में मकान लगातार गिर रहे हैं।

डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों की सेवा बेमिसाल है। जब-जब भी कोई ऐसी मुश्किल आई है तो ये सेवादार एक आह्वान पर पहुंचे और प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मदद की है। समाज के हर शख्स को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
-जेई धीरज बंसल

प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की मदद के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। बारिश और सेम नाले में जलस्तर बढ़ने से परेशानी बढ़ी है। प्रशासन के कर्मचारी और डेरा सच्चा सौदा के सेवादार पूरी तन्मयता से तटों को बांधने का काम कर रहे हैं। जब तक ये समस्या है, दिन-रात कार्य राहत कार्य जारी रहेगा।
-मनदीप सिहाग, एक्सईएन

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