बेरोजगार अध्यापक बैठक करने की देते रहे दुहाई, पुलिस ने की लाठियों की बौछार

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मीटिंग के लिए बुलाए अध्यापकों का लाठियों से स्वागत

  • पुलिस की पिटाई से ईटीटी अध्यापकों में भारी रोष

सच कहूँ/खुशवीर तूर पटियाला। प्रशासन ने बेरोजगार ईटीटी टैट पास अध्यापकों को बैठक करने के लिए बुलाया था, लेकिन पटियाला पुलिस ने अध्यापकों की पिटाई कर उनका स्वागत किया। उक्त कार्यकर्ता पुलिस को ईटीटी अध्यापक बताकर बैठक होने की दुहाई देते रहे, लेकिन पहले ही धरने से परेशान पुलिस कर्मचारियों ने अपना पूरा गुस्सा बेरोजगारों पर उतार दिया। जानकारी के अनुसार मंगलवार को ईटीटी टैट पास बेरोजगार अध्यापक नेताओं को पुलिस प्रशासन द्वारा वाईपीएस चौक में बैठक के लिए बुलाया था।

बैठक के लिए पहुंचे ईटीटी अध्यापक नेता संदीप सामा, जनरल नागरा, सुखजीत सिंह नाभा, राज सुखविन्दर, सोनिया कौर व आशीमा कौर एक तरफ खड़े हो गए। इसी दौरान वहां सांझा बेरोजगार मोर्चे द्वारा प्रदर्शन किया था। पुलिस उन्हें गाड़ियों में चढ़ाकर थाने ले गई थी। इसी दौरान एक तरफ खड़े ईटीटी नेताओं पर पुलिस ने हमला बोल दिया और लाठियों की बौछार ला दी। उन्होंने पुलिस को कहा कि वह तो प्रशासन से बैठक के लिए आए हैं, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। इसी दौरान अध्यापक नेताओं ने कहा कि उनकी बात तो सुन लो। इसके बाद डीएसपी योगेश शर्मा पहुंचे और पुलिस कर्मचारियों को रोका गया। पुलिस लाठीचार्ज के कारण उक्त अध्यापक वर्ग में भारी रोष पाया जा रहा है।

अध्यापक नेता संदीप सामा ने कहा कि यह कहां का इंसाफ है, एक तरफ बैठक के लिए बुलाया गया, तो दूसरे तरफ बात सुनने की बजाय पिटाई की गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सरेआम धक्काशाही व अत्याचार किया। नेताओं ने कहा कि यदि हमारी मांगें जल्द नहीं मानी गई तो 11 जून को मोती महल के घेराव दौरान जो जान-माल का नुक्सान होगा उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। शाम 6 बजे तक समाचार लिखे जाने तक प्रशासन द्वारा बैठक संंबंधी कोई पत्र नहीं आया था।

खून से लिखा अमरेन्द्र सिंह को पत्र

ईटीटी बेरोजगार अध्यापकों द्वारा अपनी, मांगों संबंधी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को खून से चिट्ठी लिखी गई। जिसमें बेरोजगार अध्यापकों ने अपील की कि मुख्यमंत्री साहब बेरोजगार अध्यापकों की मांगें का जल्द से जल्द हल करें। उन्होंने कहा कि यह चिट्ठी इसीलिए खून से लिखी गई है शायद खून से लिखे पत्र को देख सरकार का दिल पसीज जाए। इधर रोजगार की मांग को लेकर सुरेन्द्र गुरदासपुर 80 दिनों से टावर पर डटा हुआ है।

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