मिट्टी जांच के बाद करें उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग

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कम लागत पर अधिकतम गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ मृदा उर्वरा शक्ति को बनाये रखने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना अति आवश्यक है। (Neem Coated Urea) मिट्टी की जांच कृषि विभाग कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं निजी संस्थानों की प्रयोगशालाओं से कराई जा सकती है।

आधुनिक कृषि में रासायनिक उर्वरक एक महत्वपूर्ण कृषि निवेश है, परन्तु उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मृदा की उर्वरा शक्ति में लगातार गिरावट आ रही है। इससे फसल उत्पादन एवं उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मृदा में अनेक पौधों के पोषक तत्वों की बढ़ती कमी इस समस्या का एक स्पष्ट संकेत है। अत: कम लागत पर अधिकतम गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ मृदा उर्वरा शक्ति को बनाये रखने के लिए पृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना अति आवश्यक है। मिट्टी की जांच कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं निजी संस्थानों की प्रयोगशालाओं से कराई जा सकती है। मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों पर ही उर्वरकों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।

नत्रजन की क्षति को रोकना

फसलों द्वारा भूमि से लिये जाने वाले प्राथमिक मुख्य पोषक तत्वों तथा नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश में से नत्रजन का सर्वाधिक अवशोषण होता है, क्योंकि पौधों को इस तत्व की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है। नत्रजन का मुख्य स्त्रोत यूरिया है। सामान्य यूरिया की नत्रजन क्षमता 40:50 प्रतिशत है तथा अवशेष नत्रजन 50:50 प्रतिशत की वाष्पीकरण, लीचिंग या डिनाइट्रीफिकेशन के कारण क्षति हो जाती है। युक्ति संगत तकनीकी विधि एवं नीम लोपित यूरिया का प्रयोग करके इस क्षति को कम किया जा सकता है।

क्या है नीम लेपित यूरिया

यूरिया के ऊपर नीम के तेल का लेपर कर दिया जाता है। यूरिया के ऊपर नीम का लेप नाइट्रीफिकेशन अवरोधी के रूप में कार्य करता है। नीम लेपित यूरिया धीमी गति से प्रसारित होता है, जिसके कारण फसलों की आवश्यकता के अनुरूप नत्रजन पोषक तत्व की उपलब्धता होती है एवं फसल उत्पादन में वृद्धि होती है। नीम लेपित यूरिया सामान्य यूरिया की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम लगता है, जिससे 10 प्रतिशत यूरिया की बचत की जा सकती है।

नीम लेपित यूरिया के लाभ

  •  कृषि लागत में कमी।
  •  कृषकों की आय में वृद्धि
  •  लगभग 10 प्रतिशत तक यूरिया की बचत।
  •  10-15 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि।
  •  नत्रजन के धीरे-धीरे निकलने के कारण मृदा उर्वरा में मदद मिलती है।
  •  यूरिया का आयात कम होगा।
  •  यूरिया की सब्सिडी की बचत होगी।
  •  नीम लेपित यूरिया का संतुलित इस्तेमाल संभव होगा।
  •  यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा।
  •  पर्यावरण अनुकूल है।
  •  नत्रजन प्रयोग दक्षता में वृद्धि।
  •  नाइट्रीफिकेशन अवरोधी।
  •  वाष्पीकरण तथा निक्षालन (लीचिंग) से नत्रजन की होने वाली क्षति को कम करता है।
  •  यूरिया के असंतुलित एवं अत्यधिक मात्रा में प्रयोग से हानि।

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