अफगानिस्तान में तालिबान का क्यों बढ़ रहा है प्रभाव?

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Afghan Government

भारत-रूस आतंकवाद से लड़ने में हमें सहयोग करें: अफगानिस्तान

काबुल (एजेंसी)। अफगानिस्तान ने कहा है कि चीन, भारत और रूस उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की करने की बजाय आतंकवाद से लड़ने में हमारे सुरक्षाबलों का सहयोग करें। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब ने शुक्रवार को रोसिया 24 न्यूज चैनल से कहा, ‘हमें एक महाशक्ति को दूसरे के साथ बदलने की आवश्यकता नहीं है। शांति और स्थिरता तभी संभव है जब एक-दूसरे का सहयोग सहयोग करें।

हम विदेशी शक्तियों से आतंकवाद से लड़ने में अपने सुरक्षा बलों को सहयोग करने की अपील करते हैं। वे हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करें। हम निश्चित रूप से चीन, भारत और रूस सहित सभी विदेशी शक्तियों की तकनीकी सहायता का स्वागत करते हैं। वहीं अफगानिस्तान में तालिबानियों का प्रभाव बढ़ रहा है जिससे कई देशों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

अफगानिस्तान के करीब 1,000 नागरिकों ने ताजिकिस्तान में ली शरण

अफगानिस्तान में तालिबान की बढ़ती पकड़ के कारण इस देश के करीब 1,000 नागरिकों ने भागकर ताजिकिस्तान में शरण ली है। ताजिकिस्तान में अफगानिस्तान के राजदूत मोहम्मद जहीर अघबर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अफगानिस्तानी नागरिकों ने ताजिकिस्तान में एक शरणार्थी शिविर में शरण ले रखी है। अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ तालिबान इस देश पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है और हालात बिगड़ते जा रहे हैं। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच आतंकवादी समूह तालिबान ने देश के विशेष रूप से उत्तरी ग्रामीण हिस्सों में कब्जा करना शुरू कर दिया है।

शिविरों में रह रहे हैं अफगानिस्तानी

अघबर ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि ताजिकिस्तान में अफगानिस्तान की सीमा से लगे क्षेत्र में शरणार्थी शिविर बनाया गया है। अफगानिस्तानी राजदूत ने इस शिविर का दौरा किया। ताजिकिस्तान सीमा से लगे अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत के कई जिलों पर तालिबान के कब्जे के बाद करीब एक हजार नागरिक भागकर इस देश में आये हैं। अघबर ने इस कठिन समय में अफगानिस्तानी लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए ताजिकिस्तान की सरकार का आभार व्यक्त किया।

3 लाख अफगान सुरक्षा बलों के सामने 75 हजार तालिबान लड़ाके नहीं टिक पाएंगे:अमेरिकी राष्ट्रपति

व्हाइट हाउस में अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था, “अफगानिस्तान में एक और साल की लड़ाई का कोई हल नहीं है। बल्कि वहाँ अनंत काल तक लड़ते रहने का एक बहाना है। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान का कब्जा कोई ऐसी बात नहीं है जिसे टाला नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि तीन लाख अफगान सुरक्षा बलों के सामने 75 हजार तालिबान लड़ाके कहीं से नहीं टिक सकेंगे।

तालिबान ने दिया जवाब…

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर तालिबान ने भी एक प्रेस कान्फे्रंस कर कहा कि अगर वह चाहें तो वो दो हफ्तों में पूरे अफगानिस्तान को कंट्रोल कर सकते है।

 

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