क़साईख़ाना

कसाईखाना

वशु के बापू, जरा सुनना तो…नानकी ने बान की झोल खाती हुई खटिया पर सोए बेटे विशाल को मैली-सी पुरानी चादर उढ़ाते हुए आवाज लगाई। ‘हाँ कहो क्या बात है?’ कोठरी के बाहर ही टाट के परदे की आड़ में नहाते हुए मंगलू ने पूछा। -आज इन दो बूढ़ी हो चुकी बकरियों और एक बछड़े […]
साहित्य