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    मुर्राह भैंस व हरियाणा गाय की नस्ल के 500 कटड़ों को किया जा रहा तैयार

    National-Gokul-Mission

    राष्ट्रीय गोकुल मिशन। देश के 13 स्थानों पर मिशन के तहत कॉफ हो रहे तैयार

    (National Gokul Mission)

    • देश के 13 स्थानों पर मिशन के तहत कॉफ हो रहे तैयार
    • भिवानी में सबसे अधिक 500 कॉफ तैयार करने का लक्ष्य
    • दो नस्लों पर राष्ट्रीय गोकुल मिशन द्वारा खर्च होगा 25 करोड़
    • हरियाणा का दुग्ध उत्पादन 704 ग्राम प्रति व्यक्ति, जबकि देश का 204 ग्राम प्रति व्यक्ति

    सच कहूँ/इन्द्रवेश भिवानी। देश को दुग्ध क्रांति में अग्रणीय स्थान पर खड़ा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के पशुपालन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत अब भिवानी के कटड़ा फॉर्म में 500 मुर्राह नस्ल व हरियाणा नस्ल के कटड़ों व बछड़ों को तैयार किया जा रहा हैं। जो उच्च गुणवत्ता व अधिक दुग्ध उत्पादन वाली नस्लों को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत देश में 13 स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले कटड़ों व बछड़ों को अधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता के सीमेन तैयार करने के लिए तैयार किया जा रहा है। जिनमें से हरियाणा प्रदेश में भिवानी का कटड़ा फॉर्म को भी राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत चुना गया हैं।

    • हरियाणा दुग्ध उत्पादन पर देश में प्रथम स्थान पर है।
    • जहां देश में 204 ग्राम दुग्ध प्रति व्यक्ति उपलब्ध होता है, वही हरियाणा की दुग्ध उपलब्धता 704 ग्राम प्रति व्यक्ति है, जो हरियाणा को दूध-दही के राज्य के रूप में चरित्रार्थ करती हैं।
    • केंद्र सरकार की टीम ने भिवानी के कटड़ा फॉर्म का दौरा करने के बाद इस दुग्ध क्रांति को बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी।

    पांच वर्ष में पूरा होगा ये प्रोजेक्ट: डॉ. ओपी यादव

    इस प्रोजेक्ट के हरियाणा कोर्डिनेटर डॉ. ओपी यादव व मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कल्पना सिंह ने बताया कि हरियाणा का काला सोना कही जाने वाली मुर्राह भैंस व हरियाणा गाय की नस्ल के 500 कटड़ों व बछड़ों को यहां तैयार किया जा रहा हैं। जिनको तैयार करने के दौरान उनकी अनुवांशिकी गुणवत्ता को जांचा जा रहा हैं। इन बछड़ों व कटड़ों में टीबी, जोनीडिसीज, बुरसोलॉसिस व अन्य ट्रांसमिट होने वाली बीमारियों का डाटा इनकी गुणवत्ता व खुराक सभी का ध्यान रखते हुए छंटनी के आधार पर 500 कटड़ों व बछड़ों को तैयार किया जाएगा। जिस पर 25 करोड़ रूपये लागत आएगी तथा पांच वर्ष में इस प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा।

    20 से 25 किलो दुग्ध उत्पादन वाली भैंसोंं को किया जा सकेगा तैयार

    जिसके बाद तैयार हुए कॉफ को केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय की कमेटी द्वारा चयन करके देश के दुग्ध उत्पादक राज्यों व जिलो तक भेजा जाएगा। जहां पर इस कॉफ का सीमेन तैयार कर बेहतर गुणवत्ता व अधिक दूध देने वाली पीढ़ियों को तैयार किया जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत हरियाणा एक बार फिर से दुग्ध क्रांति को आगे बढ़ाने में अग्रणीय भूमिका निभा रहा हैं। यहां से पैदा होने वाले कॉफ के सीमेन से 20 से 25 किलो दुग्ध उत्पादन वाली भैंसोंं को तैयार किया जा सकेगा तथा इनसे पैदा होने वाली भैंस विभिन्न बीमारियों से मुक्त होंगी, जिससे पशुपालन विभाग का टीकाकरण का खर्च भी बचेगा।

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