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Monday, April 20, 2026
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    फरीदाबाद में ऑक्सीजन की बेकद्री

    Oxygen-tanker sachkahoon

    10 दिन से खड़े 10 ऑक्सीजन टैंकर, हो रही लीक

    सच कहूँ/राजेन्द्र दहिया, फरीदाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान देश व प्रदेश में हुई ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर जिस प्रकार मरीज व उनके परिजनों को परेशानियां उठानी पड़ी, उसे शायद ही वह जिंदगी भर कभी भूल पाए। अब जब दूसरी लहर में स्थिति काबू में आ गई है तो ऑक्सीजन की किल्लत भी दूर होने लगी है और दूर-दराज से मंगाई जाने वाली ऑक्सीजन की खेप भी अब बीच में ही रोक दी गई है। ऐसे ही एक मामले में पिछले 10 दिनों से ऑक्सीजन के करीब 10 से ज्यादा टैंकर फरीदाबाद के ओल्ड रेलवे परिसर में खड़े हुए है, लेकिन अभी इन्हें कभी नहीं भेजा गया है। हालात यह है कि इन टैंकरों में से ऑक्सीजन लीक होने लगी है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए है।

    गुजरात से आए थे टैंकर, प्रत्येक टैंकर में 22 टन ऑक्सीजन

    ये टैंकर गुजरात के जामनगर, हजीरा व ओडीशा के राउरकेला व अंगुल से ऑक्सीजन स्पेशल ट्रेन के जरिए आए थे और प्रत्येक टैंकर में करीब 22 टन ऑक्सीजन है। जो कि अब खड़े खड़े लीकेज भी होने लगी है। कोरोना संक्रमण का जैसे-जैसे ग्राफ कम होने लगा, वैसे ही ऑक्सीजन की मांग में भी कमी आई है, जिसके चलते यह टैंकर खाली भी नहीं हो रहे हैं और कई दिनों से एक जगह रहने के कारण टैंकर चालक व हेल्पर भी परेशान हैं।

    टैंकर चालक भी परेशान, बोले हम कहां जाएं

    टैंकर चालकों ने बताया कि हमें अभी तक यह नहीं बताया गया है की ऑक्सीजन की सप्लाई कहां देनी है। इसके अलावा हमें घर भी नहीं जाने दिया जा रहा। आलम यह है कि फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर खड़े हुए 9 से 10 दिन हो चुके हैं। कई बार उन्होंने अपने अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की मगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। टैंकर चालकों का कहना है कि जब तक उनके पास कोई संदेश नहीं मिल जाता तब तक वह ना तो घर जा सकते हैं और ना ही इन ऑक्सीजन टैंकरों को कहीं सप्लाई कर सकते हैं।

    क्या कहते हैं जीआरपी सब इंस्पेक्टर राजपाल सिंह

    जीआरपी सब इंस्पेक्टर राजपाल सिंह का कहना है कि उन्हें सभी ऑक्सीजन टैंकर चालकों की देखरेख करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है जिसे वह बखूबी निभा रहे हैं और उनके पास भी ऐसा कोई संदेश नहीं है कि इन टैंकर चालकों को कब यहां से जाने का मौका मिलेगा जब तक वह रहेंगे तब तक उनके रहन-सहन और खान-पान के व्यवस्था करते रहेंगे।

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