हमसे जुड़े

Follow us

19.8 C
Chandigarh
Thursday, February 26, 2026
More

    खतरे की घंटी: पाताल की ओर पानी

    Haryana News
    Haryana News Water Crisis सावधान! हरियाणा पर मंडरा रहे जल संकट के बादल, आने वाला समय बहुत बुरा

    सच कहूँ की अपील: पानी को व्यर्थ ना बहाएं, आने वाली पीढ़ी के लिए बचाएं

    • हरित क्रांति के बाद हरियाणा में भू-जल स्तर में लगातार गिरावट

    सच कहूँ, देवीलाल बारना कुरुक्षेत्र। हरियाणा में जिस प्रकार से भू-जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले समय में अंजाम भंयकर हो सकते हैं। 1960 के दशक में हरित क्रांति आई और खाद्यान्नों में भी भरपूर वृद्धि हुई लेकिन प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शुरू हो गया। ज्यादा उत्पादन लेने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन लगातार जारी है। कहने को तो सालों पहले सरकार द्वारा साठी धान पर रोक लगा दी थी, इससे कुछ हद तक पानी की वेस्टेज भी कम हुई है लेकिन बावजूद इसके जलस्तर हर वर्ष घटता जा रहा है।

    आंकड़ों पर यदि नजर दौड़ाई जाए तो 1960 के बाद हरियाणा में खाद्यान्नों में लगातार वृद्धि हुई

    भू-जल स्तर के गिरते स्तर के आंकड़ों को देखा जाए तो सामने आता है कि हरियाणा में जून 1974 में पूरे हरियाणा में औसत भू-जल स्तर 9.19 मीटर था जोकि जून 2014 में 17.37 तक पहुंच गया। 40 वर्ष में लगभग 27 फुट तक भू-जल स्तर नीचे चला गया। वहीं 2016 के आंकड़ों के अनुसार इससे भी ज्यादा रेशों से भू-जल स्तर घटा है। 2016 में हरियाणा में औसत भू-जल स्तर घटकर 18.66 मीटर तक चला गया है। इसके बाद के वर्षों में ओर ज्यादा भू जल स्तर नीचे चला गया है जोकि प्रदेश के लिए खतरे की घंटी है। गौरतलब हैं कि प्रदेश के 17 जिलों के 71 ब्लॉकों को पानी के अतिदोहन की श्रेणी में रखा गया है, जहां भूजल का बहुत ज्यादा दोहन हो रहा है।

    हर साल घट रहा लगभग एक मीटर भू-जल स्तर

    हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में भूजल स्तर लगभग 48 मीटर तक जा चुका है। भू-जल स्तर नीचे जाने में महेंद्रगढ़ जिला हरियाणा में प्रथम व कुरुक्षेत्र जिला दूसरे नंबर है। कुरुक्षेत्र जिले के आंकड़ों की तरफ यदि देखा जाए तो 1974 में कुरुक्षेत्र जिले का भू-जल स्तर 10.21 मीटर था, जोकि 1999 में 17.25 व 2001 में 18.01 पर चला गया। 27 साल में लगभग 25 फूट तक भू-जल का स्तर नीचे गया, जोकि प्रति वर्ष एक फुट कम हुआ। वहीं 2001 से 2020 में भू-जल स्तर 40.5 मीटर तक पहुंच गया, जोकि 20 वर्षों में लगभग 22 मीटर तक नीचे चला गया। इन 20 वर्षों में भू-जल स्तर बहुत ज्यादा तेजी से घटा है। 20 सालों में प्रति वर्ष एक मीटर से ज्यादा प्रति वर्ष की रेशों से भू-जल स्तर घटा है, जोकि खतरे की घंटी मानी जा रही है। यदि इसी प्रकार धरती से जल का दोहन होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब धरती का सारा पानी ही खत्म हों जाएगा।

    water-Table

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।