
पावन एमएसजी गुरुमंत्र माह के भंडारे में उमड़ी पंजाब, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की साध-संगत
बरनावा/सलाबतपुरा (रकम सिंह/सुखजीत मान/सुरेन्द्रपाल)। MSG Gurumantra Bhandara: डेरा सच्चा सौदा की उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब की साध-संगत ने रविवार को पावन एमएसजी गुरुमंत्र माह का पावन भंडारा श्रद्धा भाव से मनाया। इस अवसर पर एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र शाह सतनाम जी डेरा, बरनावा जिला बागपत (यूपी) और एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र शाह सतनाम जी रूहानी धाम राजगढ़-सलाबतपुरा बठिंडा (पंजाब) में पावन एमएसजी गुरुमंत्र माह के भंडारे का आयोजन किया गया। पावन भंडारे में इन राज्यों से बड़ी संख्या में साध-संगत ने शिरकत की।

उल्लेखनीय है कि पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज, पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज और पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मार्च माह में गुरुमंत्र प्राप्त किया था। इसलिए इस माह को डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत पावन एमएसजी गुरुमंत्र भंडारा माह के रूप में मनाती है। सुबह 11 बजे पवित्र नारा ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ के साथ पावन भंडारे का आगाज हुआ। इस अवसर पर साध-संगत ने पवित्र नारा लगाकर पूज्य गुरु जी को पवित्र भंडारे की बधाई दी। वहीं कविराजों ने विभिन्न भक्तिमय भजनों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया। तत्पश्चात साध-संगत ने बड़ी-बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरु जी के पावन अनमोल वचनों को एकाग्रचित होकर श्रवण किया।

इस अवसर पर डेरा सच्चा सौदा द्वारा किए जा रहे मानवता भलाई कार्यों के तहत आशियाना मुहिम के महत्व को दर्शाती एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके साथ ही नशों के खिलाफ जागरूक करते पूज्य गुरु जी के भजन ‘जागो दुनियां दे लोको’ और ‘देश की जवानी’ भी चलाए गए। नामचर्चा की समाप्ति पर सभी साध-संगत को सेवादारों ने कुछ ही मिनटों में प्रसाद और लंगर भोजन बरताया। इस दौरान साध-संगत की सुविधा के लिए डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन द्वारा की गई व्यवस्था सराहनीय रही। वहीं पावन भंडारे में ट्रैफिक, पंडाल, पेयजल, लंगर-भोजन, सफाई सहित विभिन्न समितियों के सेवादारों ने अपनी सेवाएं बखूबी निभार्इं।
सभी धर्मों की इज्जत-सत्कार करो : पूज्य गुरु जी
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने पावन अनमोल वचनों में फरमाया कि ये सब उनका (पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज का) प्रताप है। आपजी ने फरमाया कि क्या उन्होंने अपने शिष्यों की संख्या बढ़ाने के लिए या मुरीदों का नंबर ज्यादा करने के लिए सत्संगें की या कर रहे हैं? जी नहीं, नशा छुड़वाने के लिए, बुराइयां छुड़वाने के लिए, गंदी आदतों को बंदा अपने आप बदल सके उसे जगाने के लिए और बंदे से रब्ब तक का सफर कैसे तय हो सकता है बंदे को ये समझाने के लिए सच्चे दाता रहबर ने सत्संग किए, कर रहे हैं और करते ही रहेंगे। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि बुराइयां छोड़कर आज ये जीव जो बैठे हैं, साध-संगत हमारे बराबर में स्क्रीनों पर दिख रही है।

ये अपने-अपने धर्मों को मानते हैं क्योंकि सच्चे दाता ने किसी भी धर्म को बदलने के लिए कभी नहीं कहा। यदि आप गरीब हैं तो इसका मतलब ये थोड़े ही है कि आप धर्म बदल लो। धर्म कोई पैसा नहीं देता, यदि कोई देता है तो वो धर्म पवित्रता की तरफ घट रहा है। क्योंकि अगर आप पैसे से किसी बंदे को खरीद कर उसका नाम बदल दोगे या धर्म बदल दोगे। पहले तो वो बंदा ही सही नहीं, क्योंकि उसकी खानदानी वो क्या बताएगा, कि तू किस खानदान का है भाई? सारा कुछ ही बदल दिया। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि अपने धर्म में रहो। अपने धर्म को मानो। ये तो रूहानियत, सूफियत है कि अगर आप गुरु की बात को मानते हो तो यकीन मानो आपको सभी धर्मों की समझ भी आने लग जाएगी। सभी धर्मों की इज्जत करो, सत्कार करो। डेरा सच्चा सौदा में यही सिखाया गया है और यही सिखाया जा रहा है और हमेशा यही सिखाया जाएगा। कोई ऊँच-नीच नहीं होती, कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। सभी से बेग़र्ज प्यार करो।

ये सतगुरु जी ने सिखाया, ये सतगुरु जी ने बताया, क्योंकि जितना उनका गुण गाएं उतना ही थोड़ा है। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत को अंधविश्वासों के प्रति जागरूक करते हुए फरमाया कि सत्संगी को जादू-टोना,ताबीज़, नज़र लगनी, भूत-प्रेत, जिन्न-चुड़ैल, श्याणे/ चेले/ ओझा/ बेगे के चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। आपजी ने फरमाया कि इस धरती पर भूत-प्रेत होते ही नहीं हैं और ना ही कोई नज़र लगती है। खास कर माता-बहनें इन चक्करों में ज्यादा पड़ती हैं। आपजी ने फरमाया कि धर्मों के अनुसार सच्चा व्रत यही है कि 24 घंटे सिर्फ और सिर्फ पानी पर रहो। व्रत खोलने के बाद हल्का भोजन लो, इससे आप शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। इस बात को अब विज्ञान भी मानता है।


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