गाजियाबाद(सच कहूँ/रविंद्र सिंह )। राजधानी दिल्ली से सटे हॉट सिटी में शुमार शहर गाज़ियाबाद में बढ़ते कूड़ा संकट ने नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बैंक्वेट हॉल से कूड़े की बड़ी निकासी तो नियमित रूप से हो रही है, लेकिन उसके वैज्ञानिक निस्तारण के पर्याप्त उसके पास इंतजाम नहीं हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश बैंक्वेट हॉल बिना मानकों का पालन किए संचालित हो रहे हैं और कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी पूरी तरह नगर निगम पर आ गई है।
276 बैंक्वेट हॉल, लेकिन कचरा प्रबंधन का अभाव
नगर निगम के विभिन्न जोनों में कुल 276 बैंक्वेट हॉल संचालित हैं। इनमें कविनगर जोन में 75 , वसुंधरा में 76 , मोहन नगर में 48 , सिटी जोन में 45 और विजयनगर जोन में 32 बैंक्वेट हॉल शामिल हैं। इन सभी से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर उसके निस्तारण के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
सोसायटियों और नगर पालिकाओं की स्थिति भी समान
केवल बैंक्वेट हॉल ही नहीं, बल्कि क्रॉसिंग, प्रताप विहार की आवास विकास कॉलोनियां, डासना, खोड़ा, मुरादनगर और लोनी नगर पालिकाओं के पास भी अपना डंपिंग यार्ड नहीं है। ऐसे में इन क्षेत्रों का कचरा भी नगर निगम के लिए अतिरिक्त बोझ बनता जा रहा है।
प्रतिदिन 1800–2000 टन कचरा, निगम पर पूरी जिम्मेदारी
गाजियाबाद में रोजाना लगभग 1800 से 2000 टन कचरा उत्पन्न होता है। इस पूरे कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी नगर निगम को ही उठानी पड़ रही है, जबकि कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों की ओर से सहयोग नगण्य है।
कूड़े से बिजली उत्पादन, गालंद परियोजना में अड़ंगा
नगर निगम ने कचरा निस्तारण के लिए गालंद क्षेत्र में एक बड़े प्रोजेक्ट की योजना बनाई थी, जिसमें कचरे से बिजली उत्पादन भी प्रस्तावित था। बिल्डरों के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर जमीन की प्लॉटिंग और व्यावसायिक हितों के चलते यह परियोजना अटक गई। परिणामस्वरूप, आज तक वहां डंपिंग यार्ड विकसित नहीं हो सका।
जन विरोध के चलते निगम की कोशिशें बार- बार नाकाम
कूड़ा निस्तारण करने के इंतजाम के लिए नगर निगम अफसर सतत लगे हुए है। महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के निर्देश पर, निगम स्वास्थ अधिकारी डॉ मिथलेस कुमार और उनकी टीम इस पर दिन रात काम कर रही है। लेकिन कई जगह जनता के विरोध ने उनके प्रयासों को असफल कर दिया। मुरादनगर पाइप लाइन उसके बाद डासना और उसके बाद लोनी क्षेत्र में जनता के विरोध ने निगम की कोशिशों को अधर में लटका दिया। शहर के कूड़े पर राजनीति भी कम नहीं हो रही, किसी को अपना वोटर खिसकता दिख रहा है तो किसी को अपनी प्रॉपर्टी के दाम। कुछ लोगों के लाभहित के चलते विकराल जन समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है ।अब सवाल उठता है आखिर कूड़ा डालेगा कहाँ। घरों से प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा विकराल रूप धारण करे इससे पूर्व इसका समाधान जरूरी है। और यह जन सहयोग के बिना नहीं होगा।
बैंक्वेट हॉल से कूड़ा संकट के ये हैं मुख्य बिंदु
अत्यधिक कचरा: विवाह और अन्य आयोजनों से निकलने वाला ठोस और गीला कचरा नगर निगम की क्षमता पर बोझ डाल रहा है । निस्तारण का अभाव: अधिकांश बैंक्वेट हॉल कचरे के निस्तारण की वैज्ञानिक पद्धति का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे कचरे का अंबार लग रहा है। सख्ती की चेतावनी: नगर निगम के अधिकारियों ने सफाई नायकों को निर्देशित किया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जुर्माने की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निगम के जरिए सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम:
सीटीवी निगरानी: प्रमुख स्थानों और सड़कों के किनारे कचरा डालने वालों को पकड़ने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है।
निस्तारण के लिए निर्देश: संस्थाओं को अपना कचरा स्वयं निष्पादित करने या अधिकृत एजेंसियों को सौंपने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
जनसहयोग के बिना समाधान मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि कचरा प्रबंधन केवल नगर निगम के भरोसे संभव नहीं है। इसके लिए बैंक्वेट हॉल संचालकों, सोसायटियों और आम नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। स्रोत पर कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण के उपाय अपनाने होंगे।
भविष्य के लिए चेतावनी
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गाजियाबाद में कूड़ा संकट गंभीर रूप ले सकता है। बढ़ता कचरा न केवल पर्यावरण बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।















