Agricultural News: जानें, बीज रहित बैंगन की खेती कैसे करें, किसानों को मिलेगा अधिक लाभ

पॉलीहाउस में बीज रहित बैंगन की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प

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Seedless Brinjal Farming: हिसार। बदलते मौसम, अनिश्चित वर्षा और बढ़ती कृषि लागत के बीच पॉलीहाउस में बीज रहित बैंगन की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बनकर सामने आ रही है। संरक्षित वातावरण में की जाने वाली इस खेती से फसल को तेज गर्मी, अत्यधिक वर्षा, ठंडी हवाओं और अन्य प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से सुरक्षा मिलती है। Agricultural News

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान लंबे समय तक गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई और अगस्त में पौध रोपाई करने पर सितंबर-अक्टूबर में फूल आने शुरू हो जाते हैं, जबकि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से फल तुड़ाई शुरू हो जाती है। इसके बाद नवंबर से मार्च तक लगातार उत्पादन मिलने से किसानों को नियमित आमदनी प्राप्त होती है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बेहतर उत्पादन के लिए रोगमुक्त और मजबूत पौध तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए मिट्टी रहित माध्यम (Soilless Media) का उपयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है। उन्नत संकर किस्मों के पौधे लगभग एक माह में रोपाई योग्य हो जाते हैं। रोपाई से पहले जड़ों का जैविक फफूंदनाशकों से उपचार करने पर शुरुआती रोगों की संभावना काफी कम हो जाती है। Agricultural News

जिग-जैग रोपाई और ड्रिप सिंचाई से बढ़ती है गुणवत्ता

विशेषज्ञों की सलाह है कि उठी हुई क्यारियों में जिग-जैग पद्धति से पौध लगाने पर पौधों को पर्याप्त धूप और वायु मिलती है, जिससे रोगों का प्रकोप कम होता है और फल अधिक आकर्षक बनते हैं।

पॉलीहाउस में ड्रिप सिंचाई प्रणाली सबसे प्रभावी मानी जाती है। इसी माध्यम से पानी में घुलनशील उर्वरकों की आपूर्ति करने पर पौधों को संतुलित पोषण मिलता है। इससे फल का आकार, रंग और चमक बेहतर होती है, साथ ही पानी की बचत भी होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर पुरानी, कमजोर और रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई करने से नई शाखाएं विकसित होती हैं। इससे पौधों की उत्पादक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है और लगातार तुड़ाई संभव होती है। Agricultural News

कीट एवं रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान जरूरी

संरक्षित खेती में भी सफेद मक्खी तथा अन्य रस चूसने वाले कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके नियंत्रण के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप प्रभावी माने जाते हैं। इसके अलावा नियमित निरीक्षण, संक्रमित भागों को हटाना तथा जैविक नियंत्रण उपाय अपनाने से रासायनिक दवाओं की आवश्यकता कम हो जाती है।

बीज रहित बैंगन की गुणवत्ता और बाजार में इसकी बढ़ती मांग के कारण किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। एक बार फसल स्थापित होने के बाद कई महीनों तक नियमित तुड़ाई होने से यह खेती कम समय में अधिक लाभ देने वाली तकनीकों में शामिल होती जा रही है। Agricultural News

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