Farmers Protest: भारत -अमेरिका ट्रेड डील किसानों का डेथ वारंट साबित होगा: बिजेंद्र सिंह

अमेरिका-भार ट्रेड डील का विरोध, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर आक्रोशित भाकियू का प्रदर्शन 

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Farmers Protest:  गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने मंगलवार  को राष्ट्रीय आह्वान पर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में जनपद के दर्जनों गांवों से किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों से कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ट्रेड डील) का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को पर्याप्त सुरक्षा के बिना विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोला गया तो इसका सबसे अधिक नुकसान देश के छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ेगा। भाकियू का कहना है कि विदेशी सब्सिडी प्राप्त कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय कृषि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद प्रणाली तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

भाकियू ने जनपद की स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया | Farmers Protest

ज्ञापन के साथ भाकियू ने जनपद की स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। संगठन ने किसानों को डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति में सुधार, गन्ना किसानों के लंबित भुगतान तथा वेव सिटी बिल्डर से प्रभावित किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की। साथ ही पूर्व में किसानों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर भी कड़ा रोष व्यक्त किया गया। भाकियू जिला अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि वेव सिटी बिल्डर और किसानों के बीच शीघ्र सकारात्मक वार्ता कर समाधान नहीं निकाला गया तो संगठन बिल्डर के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। आंदोलन की तिथि भाकियू की प्रशासनिक समिति तय करेगी।

किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा:बिजेंद्र सिंह 

बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन पिछले चार दशकों से किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण संघर्ष करती रही है। वर्तमान समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। गन्ना भुगतान लंबित है, उर्वरकों की समय पर उपलब्धता नहीं हो पा रही है और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सी-2+50प्रतशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी

ज्ञापन में संगठन ने सभी फसलों पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2+50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, किसानों एवं कृषि मजदूरों की ऋणमाफी, कृषि के लिए निःशुल्क बिजली, ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, डीएपी-यूरिया की निर्बाध उपलब्धता, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा, फसल बीमा योजना में सुधार, भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का सख्ती से पालन तथा कृषि और डेयरी क्षेत्र को प्रभावित करने वाले किसी भी मुक्त व्यापार समझौते से बचने की मांग की। इसके अलावा डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीज क्षेत्र में बढ़ते एकाधिकार पर नियंत्रण, कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा प्रभावी एवं न्यायसंगत जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की भी मांग उठाई गई।

कृषि आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला:भाकियू

भाकियू नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कृषि केवल किसानों की आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। यदि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से 15 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

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