लघुकथा : बड़ी सोच

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Big-thinking

एक बार एक आदमी ने देखा कि एक गरीब फटेहाल बच्चा बड़ी उत्सुकता से उसकी महंगी ऑडी कार को निहार रहा था। गरीब बच्चे पर तरस खा कर अमीर आदमी ने उसे अपनी कार में बैठा कर घुमाने ले गया।
लड़के ने कहा-‘‘साहब आपकी कार बहुत अच्छी है, यह तो बहुत कीमती होगी न…।’’
अमीर आदमी ने गर्व से कहा- ‘‘हां, यह लाखों रुपए की है।’’
गरीब लड़का बोला-‘‘ इसे खरीदने के लिए तो आपने बहुत मेहनत की होगी?’’
अमीर आदमी हंसकर बोला- ‘‘यह कार मुझे मेरे भाई ने उपहार में दी है।’’
गरीब लड़के ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘‘वाह! आपके भाई कितने अच्छे हैं।’’
अमीर आदमी ने कहा- ‘‘मुझे पता है कि तुम सोच रहे होंगे कि काश तुम्हारा भी कोई ऐसा भाई होता जो इतनी कीमती कार तुम्हे गिफ्ट देता!!’’
गरीब लड़के की आंखों में अनोखी चमक थी,
उसने कहा-‘‘नहीं साहब, मैं तो आपके भाई की तरह बनना चाहता हूं…’’
सार : अपनी सोच हमेशा ऊंची रखो, दूसरों की अपेक्षाओं से कहीं अधिक ऊंची, तो तुम्हें बड़ा बनने से कोई रोक नहीं सकता।

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