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    अस्पताल में शौचालयों के दरवाजे टूटे, क्वालिटी में नंबर-1 के ख्वाब

    सिविल सर्जन की नाराजगी के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

    • पुरुष शौचालय के साथ महिला शौचालय के भी दरवाजे टूटे
    • शौचालयों व अन्य स्थानों पर शीशे की खिड़कियां भी टूटी हैं

    गुरुग्राम। (संजय कुमार मेहरा) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कार्यक्रम नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) के सर्वेक्षण में नंबर-1 आने के ख्वाब तो गुुरुग्राम का नागरिक अस्पताल सेक्टर-10 प्रशासन देखता है, लेकिन क्या यहां काम ऐसे हैं। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं कि अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां के शौचालयों से दरवाजे एक तरह से गायब हैं। खिड़कियां टूटी हैं। दीवारों से सीमेंट गिर रही है। इन सब कमियों के बाद भी अगर अस्पताल को अव्वल दर्जा मिलता है तो यह गहन सोच का विषय है।

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    आपको बता दें कि गुरुग्राम के नागरिक अस्पताल के गेट नंबर-2 के भीतर जाते ही सीधे हाथ की तरफ जो पुरुष शौचालय बना है, उसके हाल बहुत बुरे हैं। एक शौचालय का दरवाजा तो ऊपर से नीचे तक टूटकर गायब है। साथ वाले शौचालयों के दरवाजे भी क्षतिग्रस्त हैं। इसकी ऊपरी मंजिल पर भी हाल कुछ ऐसे ही हैं। पहली मंजिल पर तो महिलाओं के शौचालय का दरवाजा भी नीचे से टूटा हुआ है। इसी के ठीक ऊपर छत से फाइबर की शीट लंबे समय से टूटी पड़ी है। जब बरसात आती है तो पानी अस्पताल के अंदर गिरता रहता है। इसका भी कोई इलाज नहीं किया गया है।

    सीएमओ के आदेश भी हुए हवा-हवाई

    बीती एक फरवरी को सिविल सर्जन डा. विरेंद्र यादव ने अस्पताल में ईवनिंग ओपीडी और बच्चे के जन्म दिन वाले ही जन्म प्रमाण पत्र देने की सुविधा शुरू की थी। उस दिन उन्होंने अस्पताल में भी सुविधाओं का जायजा लिया था। नीचे के शौचालय में अंदर तक उन्होंने टूटा दरवाजा देखकर संबंधित अधिकारियों से सवाल-जवाब किए थे। उनके समक्ष जल्द ही एल्युमिनियम के दरवाजे लगाने की बात हुई थी। एक फरवरी से लेकर अब तक इस दिशा में काम होना तो दूर, शायद किसी ने इस पर सोचा भी ना हो। अगर सोचा होता तो कुछ काम हुआ नजर आता। सीएमओ के दौरे के दौरान सब ठीक करने के दावे अब धरातल पर नजर नहीं आ रहे।

    …तो क्या दिखावे के लिए ही चमकाते हैं अस्पताल

    अस्पताल में पहले भी एनक्यूएएस की टीम ने दौरे किए हैं। जब ऐसा दौरा र्प्रस्तावित होता है तो अस्पताल को चमकाने में प्रबंधन कोई कमी नहीं छोड़ता। दिन में कई बार फर्श की सफाई, शौचालयों की सफाई दिखाई जाती है। यहां तक कि आम आदमी को शौचालयों में हाथ धोने के लिए लिक्विड साबुन के डिस्पेंसर तक लगा दिए जाते हैं। दौरे के बाद फिर से स्थिति पुराने ढर्रे पर आ जाती है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि क्या दिखावे के लिए ही अस्पताल को चमकाया जाता है।

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